After Die?

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Once a curious person asked Kabir  that the human body is lying here in the end and its soul gets out. Can we find out that after the death of that man’s body, where does he go? The question was very interesting and complex.

Kabir said that whosoever goes out of this world goes by giving his full address and introduction. His situations are also different. Should be recognizable only.

Primarily the creatures born in the world are divided into three departments.

1. Inside Water: All the animals living in water.

2. Overland: all the creatures flowing on the earth.

3. Over Sky: All the creatures going in the sky.

Four sections of three departments have also been created.

1. Genetics: Man born from mother’s womb.

2. Eggs: Animals originating from eggs.

3. Swadge: Born from sewage, urine, and sweat.

4. Earth: Creatures originating from Earth.

You understand it like this

* Animals living in water- 9 lakhs

* Trees and plants – 2 million

* Bugs and bugs – 11 million

* Bird – one million

* Animals – 30 lakhs

* Gods and humans etc. – 4 lakhs

Total birth – 84 lac

There is a movement to leave the body of an organism. Mainly, it is of three types: In life, the creature has to go to any other person i.e vertical motion, Steady speed, Speed down.

According to the Upanishads and Geeta, after the death, 8 kinds of souls have been considered. These motions only determine the condition or direction of the soul.

Agati-

The person does not get salvation in the Agati and he has to be born again. There are 4 types of Agati- Ventilation, Landform, Odds, and Durgati.

1.     Ventilation  -In life, in the absence of life, the creature comes again in the form of a dead person and lives a saintly life

2.     Landform – In landlady, he gets a happy and prosperous life.

3.     Odds – The lowly or the animal goes into life.

4.     Durgati –  In the motion, he lives like insects

Types of Speed –

People have been given under the speed.

1. Brahmaklok

2. Devalok

3. Fathers

4. Hell

According to his deeds, the creature goes into the above-mentioned places.

God’s Secret

Hindi Translation-

एक बार एक जिज्ञासू ने कबीर से पूछा कि यह बात सभी जानते हैं कि अंत समय में मनुष्य का शरीर यहाँ पड़ा रहा जाता है और उसके प्राण निकल जाते है। क्या हम उस मनुष्य के मरने के बाद उसके शरीर को देखकर पता लगा सकते हैं कि वह कहाँ जाता है? प्रश्न बड़ा रोचक और जटिल था।

कबीर ने कहा कि जो भी इस दुनिया को छोड़कर जाता है वह अपना पूरा पता और परिचय देकर जाता है। उसकी स्थितियां भी अलग अलग होती हैं। केवल पहचानने वाला होना चाहिये।

मुख्यतया संसार में पैदा होने वाले प्राणियों को तीन विभागों में बांटा गया है।

1. जलचर : जल में रहने वाले सभी प्राणी।
2. थलचर : पृथ्वी पर विचरण करने वाले सभी प्राणी।
3. नभचर : आकाश में विहार करने वाले सभी प्राणी।
तीन विभागों के भी चार वर्ग बनाये गये है।
1. जरायुज : माता के गर्भ से जन्म लेने वाले मनुष्य।
2. अंडज : अंडों से उत्पन्न होने वाले प्राणी।
3. स्वदेज : मल,मूत्र और पसीने से उत्पन्न जन्तु।
4. उदि्भज : पृथ्वी से उत्पन्न प्राणी।
आप इसे इस तरह समझें
* पानी में रहने वाले जीव-जंतु- 9 लाख
* पेड़ और पौधे- 20 लाख
* कीड़े और मकौड़े- 11 लाख
* पक्षी- 10 लाख
* पशु- 30 लाख
* देवता और मनुष्य आदि- 4 लाख
कुल योनियां- 84 लाख। 
जीव के शरीर छोड़कर जाने की गति होती है। मुख्यतः ये तीन प्रकार की होती है गति में जीव को किसी लोक में जाना पड़ता है।
1. ऊर्ध्व गति
2. स्थिर गति
2. अधो गति
उपनिषदों और गीता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की 8 तरह की गतियां मानी गई हैं। ये गतियां ही आत्मा की दशा या दिशा तय करती हैं।
1. अगति : अगति में व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिलता है और उसे फिर से जन्म लेना पड़ता है। अगति के 4 प्रकार हैं-
1. क्षिणोदर्क
2. भूमोदर्क
3. अगति
4. दुर्गति
1. क्षिणोदर्क : क्षिणोदर्क अगति में जीव पुन: पुण्यात्मा के रूप में मृत्युलोक में आता है और संतों-सा जीवन जीता है।
2. भूमोदर्क : भूमोदर्क में वह सुखी और ऐश्वर्यशाली जीवन पाता है।
3. अगति : अगति में नीच या पशु जीवन में चला जाता है।
4. दुर्गति : गति में वह कीट-कीड़ों जैसा जीवन पाता है
गति के प्रकार –
गति के अंतर्गत 4 लोक दिए गए हैं।
1. ब्रह्मलोक
2. देवलोक
3. पितृलोक
4. नर्कलोक
जीव अपने कर्मों के अनुसार उक्त लोकों में जाता है।

 

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