Apsara free by Kabir Ji

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Mecca Sharif is a pilgrimage place for Muslims in the west. With a desire to become the King of Heaven long ago, Hindu sages bhrigu rishi used to meditate there etc. Once the King of heaven Indra sent fear of snatching the kingdom of heaven to disperse the austerities of the sages, he sent the Apsara named Rishika and said that go and disturb his penance. Rishta went there and began to woo them. There the curse of Rudrakshi was cursed that you go and go to Kasi Nagar and become a whore. When Satguru Kabir heard this, he felt pity on Rishta.

In the month of March, Kabir Ji was going on the Ganga coast with Ravidas. Ravidas had a bottle full of Ganga Jal in his hands. People teasing from Kabir said to Rishta, “Put your hand in Kabir’s throat and walk with him on the road, then we will get an opportunity to do evil of Kabir.” Kabir ji did not say anything about Rishali’s heart and stood with him in the kachhari of the king’s palace of Kasi. Then those present there started to laugh at Kabir. Some people would say that this Kabir will have some leela, they can do anything. Their Leela is immature.   Some people say that he wrote 1400 books on the same night, some say that Ramanand was alive, he get rid of the punishment of Raja Sikandar, defeated Gorakh, born Kamdhenu, how far his lila should be told. It is very difficult to know the glory of saints, but it is very difficult to know Mahima of Brahma Vishnu Mahesh.

When Kabir ji reached the court of Kasi Nagari, then there was also king of Bandh area Bir Singh to visit Holi. Kabir ji stood before them but the two kings did not bow down. Kabir ji said, O Ravi Das, put the water of your water in my feet. King of Kasi said If someone does not respect you, then you are cursing? Kabir says I do not have any desire for respect and humiliation, it is the same for me. While cooking a panda meal in Jagannath Puri, the kitchen is burned and he has called me, so I put water. Now he must have been cured by the cold. King of kasi wrote the letter, and the truth was that kabir did the same. When Kabir started walking from there,  Rishika fell on his feet and said that she is a very fallen woman, all my sins have ended as I touch you. Please grant me liberation. Then Kabir said, worshiping Satyaam and meditating and worshiping, I gave you salvation and blessed that you go to Mannapur and there you will have five sons. They will be my big devotees. The people who got jealous of Kabir went away from there. Kabir also went to his ashram.

Here the answer came from Jagannathpuri that if there were no Kabir here, the entire city would be burnt with fire. Then the king wondered how Kabir was revealed in both places. He immediately came to Kabir’s ashram and saluted Kabir and apologized for not honoring him. Kabir blessed them and they went to their castle.

Indian religion culture


हिंदी अनुवाद —

पश्चिम दिशा में मक्का शरीफ मुसलमानों का तीर्थ है।काफी समय पहले स्वर्ग का राजा बनने की इच्छा से  हिन्दू मुनि लोग भृगु आदि वहां तपस्या करते थे। एक बार स्वर्ग के राजा इंद्र ने स्वर्ग का राज छीनने की डर से ऋषि मुनियों की तपस्या भंग करने के लिए रिशाला नाम की अप्सरा को भेजा और कहा कि जाकर उनकी तपस्या भंग करो। रिशाला वहां जाकर उनको रिझाने लगी। वहां रुद्राक्षी नाम के मुनि ने श्राप दे दिया कि जाओ तुम कासी नगरी जाकर वैश्या बनोगी। सतगुरु कबीर ने जब यह बात सुनी तो उनको रिशाला पर दया आ गयी।

मार्च के महीने मे कबीर जी रविदास को लेकर  गंगा तट पर जा रहे थे।रविदास के हाथ में गंगाजल से भरी बोतल थी। कबीर से चिढ़ने वाले लोगों ने रिशाला से कहा जाओ तुम कबीर के गले में हाथ डालकर सड़क पर उनके साथ चलो, तब हमको कबीर की बुराई करने का मौका मिलेगा। कबीर जी रिशाला के दिल की बात जानकर कुछ नही बोले ओर उसके साथ ही कासी के राजा के महल की कचहरी में जाकर खड़े हो गये।तब वहां मौजूद लोग कबीर की हंसी उड़ाने लगे। कुछ लोग कहते जरूर ये कबीर की कोई लीला होगी, ये कुछ भी कर सकते हैं। इनकी लीला अपरम्पार हैं। कुछ लोग कहते एक ही रात मैं 1400 ग्रंथ लिख दिए, कुछ कहते रामानंद को जीवित किया, राजा सिकंदर की जलन ठीक करी , गोरख को हराया, कामधेनु को प्रगट किया, इनकी लीला कहाँ तक कही जाये। ब्रह्मा विष्णु महेश की महिमा कोई जान भी ले पर संतों की महिमा जानना बहुत ही मुश्किल है।

कबीर जी कासी नगरी के राजा की कचहरी मे पहुचे तो वहाँ  होली करने के लिए बान्धव नरेश बीर सिंह भी आये थे। कबीर जी सामने खड़े हुऐ पर दोनों राजाओं ने प्रणाम नहीं किया। कबीर जी बोले अरे रविदास, तुम्हारी बोतल के गंगा जल को मेरे पांव में डाल दो। कासी नरेश बोले मैंने तुम्हारा आदर नहीं किया तो क्या श्राप दे रहे हो ?  कबीर बोले मुझे आदर और निरादर की कोई इच्छा नही रहती, ये मेरे लिए एक समान है। जगन्नाथ पुरी में एक पंडा भोजन बनाते समय पाकशाला मैं जल गया है और उसने मुझे पुकारा है, इसलिए मैंने जल डाल दिया। अब वह ठंडा ओर ठीक हो गया होगा। कासी नरेश ने पत्र लिखकर पता किया तो सच मैं वैसा ही हुआ था। कबीर जी जब वहाँ से चलने लगे तो रिशाला कबीर के पैरों में गिर कर बोली है कबीर में बहुत गिरी हुई औरत हूं, आपको स्पर्श करते ही मेरे सारे पाप खत्म हो गये। मुझे कृपा कर मुक्ति दान दीजिये। तब कबीर बोले जा सत्यनाम का ध्यान और भजन कर, तुझे मैंने मुक्ति दी ओर आशीर्वाद दिया कि तुम मानकपुर में जाकर रहो, वहाँ तेरे पाँच पुत्र होंगे। वे मेरे बड़े भक्त होंगे। कबीर से चिढ़ने वाले लोग बड़े मायूश होकर वहाँ से चले गये। कबीर भी अपने आश्रम को चले गये।

इधर जगन्नाथपुरी से पत्र का जबाब आया कि यदि यहां कबीर नहीं होते तो पूरी नगरी आग से जल जाती। तब राजा को आस्चर्य हुआ कि कबीर दोनों जगह कैसे प्रगट हो गये। वह तुरंत कबीर के आश्रम आये तो कबीर को प्रणाम किया और आदर न करने की माफी माँगी। कबीर ने उनको आशीर्वाद दिया और वे अपने महल चले गये।

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