Chanting Glory

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A devotee who believed in God used to do the butcher’s work for the family observance. He did not like this work, so he came to the saint and said that I do not want to do this work, but what should I do? Everyone in my family has been doing this work. Because of this, I have to do the work of a butcher.

The saint gave him aNam-Dan  (Nam-prayer, dan-alms giving) saying that you keep chanting the name at all times to destroy your sins. The butcher kept chanting the name while doing all his work. Even selling meat, he used to chant the name.

One day he went to the market to take a new weight. On the way, his money had fallen somewhere, so he was returning home. On the way, he found a black round stone. He thought that its use would be used as a measurement for measuring meat. So he took up the stone and put it in his pocket.

When he came back, he used to make the stone lobbying. The weight that he would have to weave, the stone becomes so weighty. He was surprised to see the miraculous stone.

Gradually, it became known to everyone that the butcher had a miraculous stone. He wants to equate the stone as much as he wants. According to the weight, the stone itself gets heavier.

One day a person went to the shop because of the eagerness to see the stone. He stood far away and saw the butcher to tuck the meat. He saw that the stone was weighing all kinds of weight equal. After rushing the crowd, he went to the butcher.

The butcher told him how much dose is needed? He said I do not have to buy the breed. I came to see it after listening to the discussion of this stone. The butcher gives him the stone to see.

After looking at the stone, he told the butcher, who is treating the meat as a stone, in fact, it is Shivling. Keeping this sacred stone in the middle of the thorns is a great sin. After hearing this, Butcher felt that he was unknowingly doing sin. The butcher gave the stone to him and said that where the stone remains holy, you keep it there.

When he came home, he used to take bath to Shivalinga and worship him. Shiva was pleased with his worship and offered him a boon in the dream saying that I should leave it to the butcher. If you worship my worship then I like it. But the devotee who chants my name all the time, the devotee loves me the most

The next day, he went to the butcher to give stone and told him the whole story. Tears came in the eye of the butcher after listening to the Brahmin. The butcher thought that God loves him so much and he sells such inhuman animals and murders them. He felt very greediness.

He gave up the work of the butcher and placed the temple in a holy place on the bank of the river. The crowd of devotees began to grow. In this way, after getting a nomination, his livelihood started and he got into good deeds. A stone and the secret name of God had changed his life.

Kabir says that daily go and listen to the saints, this will remove your bad intelligence and they will tell you right intelligence.

कबीर संगत साधु की, नित प्रति कीजै जाय।

दुर्मति दूर बहावसी, देशी सुमति बताय।।

Think Big

Hindi Translation-

ईस्वर पर आस्था रखने वाला एक भक्त अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिये कसाई का काम करता था। उसे यह काम पसंद नहीं था इसलिए वह संत के पास आया और कहा कि मैं यह काम करना नहीं चाहता, पर क्या करूँ ?  मेरे खानदान में सभी लोग  इसी काम को करते आ रहे है। इस कारण मुझे भी कसाई का काम करना पड़ता है।

संत ने उसे नाम दान प्रदान करते हुए कहा कि तुम अपने पापों का नाश करने के लिये हर समय नाम का जप करते रहना। कसाई अपने सभी कामों को करते हुऐ नाम का जप करते रहता था। यहां तक की मांस को बेचते हुए भी वह नाम को जपता था।

एक दिन वह नया बाँट लेने बाज़ार गया। रास्ते में उसके पैसे कहीं गिर गये थे इसलिये वह वापस घर लौट रहा था। रास्ते में उसे एक  काले रंग का गोल पत्थर मिला। उसने सोचा कि इसका उपयोग वजन मापने के लिये बाँट की तरह करेगा। इसलिये उसने पत्थर उठाकर अपनी जेब में रख लिया।

वापिस आकर उसने पत्थर को मांश तोलने के काम में लगाया। जितना वजन उसको तोलना होता, पत्थर उतने वजन का ही हो जाता है। वह चमत्कारी पत्थर को देखकर आश्चर्यचकित था।

धीरे-धीरे यह बात सबको पता चल गयी कि कसाई के पास एक चमत्कारी पत्थर है। वह जितना चाहता है पत्थर उतना ही तोलता है। भार के हिसाब से वह पत्थर अपने आप भारी हो जाता है।

एक दिन एक व्यक्ति पत्थर देखने की उत्सुकता के कारण उसकी दुकान में गया। वह दूर खड़े होकर कसाई को मीट तोलते देखने लगा। उसने देखा कि वह पत्थर हर प्रकार के वजन को बराबर तोल रहा था। भीड़ छटने के बाद वह कसाई के पास गया।

कसाई ने उससे कहा कि कितना मांश चाहिए? वह बोला मुझे मांश नहीं खरीदना है। मैं इस पत्थर की चर्चा सुनकर इसे देखने चला आया था। कसाई ने वह पत्थर उसको पकड़ा दिया।

पत्थर देखने के बाद उसने कसाई को बताया कि जिसे पत्थर समझ कर वो माँस तोल रहा है, वास्तव में वह शिवलिंग हैं। इस पवित्र पत्थर को गले-कटे मांस के बीच में रखना बहुत बड़ा पाप है । यह बात सुनकर कसाई को लगा कि वह अनजाने में पाप कर रहा है। कसाई ने पत्थर उसे दे दिया और कहा कि जहां यह पत्थर पवित्र रह सके, तुम इसे वहां रख देना।

घर आकर उन्होंने शिवलिंग को स्नान करवाया व पूजा अर्चना की। उसकी पूजा से शिव प्रसन्न हो गये ओर स्वप्न में उसको वरदान देते हुए कहने लगे कि मुझे उस कसाई के पास ही छोड़ आओ। तुम मेरी अर्चना-पूजा करते हो तो मुझे अच्छा लगता है। परन्तु जो भक्त मेरे नाम का जप हर वक्त करता है वह भक्त मुझे सबसे ज्यादा प्रिय है।

अगले दिन वह पत्थर देने कसाई के पास गया और उसको सारी बात बता दी। ब्राह्मण की बात सुनकर कसाई की आंखों में आँसू आ गए। कसाई ने सोचा कि ईस्वर उससे इतना प्यार करते हैं और वह ऐसे निरीह जानवरों को कत्ल करके बेचता है। उसे बहुत आत्मग्लानि हुई।

उसने कसाई का काम छोड़ दिया और लिंग को नदी किनारे किसी पवित्र स्थान में रखकर उसका मन्दिर बनाया। भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी। इस प्रकार नामदान पाकर उसकी आजीविका चलने लगी और वह सत्कर्मो में लग गया। एक पत्थर और नामदान ने उसका जीवन बदल दिया।

कबीर कहते हैं-

“कबीर संगत साधु की, नित प्रति कीजै जाय।

दुर्मति दूर बहावसी, देशी सुमति बताय।।”

कबीर कहते है कि रोज़ जाकर संतों की संगत करो, इससे तुम्हारी दुर्बुद्धि दूर हो जायेगी और वे तुमको सद्बुद्धि बताएंगे।

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