Devilish power

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Kabir Ji said that this creature is a very dangerous and strong devilish power, whose name is MUNN (The generator of thought) has kept us very tightly. The soul of the creature is clean, compassionate and devoid of disorders. In the scriptures, the interpretation of the soul is written. This is neither a woman nor a man. However, the soul has no concern with the mind, intellect, memory of mind, ego and also five disorders like work, anger, greed, attachment, and ego, respectively. It is continual, unchanging, forever, immortal and indestructible. It can not be destroyed in any period. It’s calm and steady. This is serious. It is devoid of all disorders. This is unborn.

Where did such disorders come from this body? Where are they located in our body from where are they doing their job.  Ofcourse there is something wrong. It seems that some dangerous power is working in this body. Their emphasis is also going on, and their strength is doing their work equally in every organism. All the root and chemistry of this world is coming to its root. We are also getting evidence of this in the stories. It means that the power which is affecting us all is very powerful. He has strength to kill many people in the world by showing his game and we say that this will be God’s will. It seems we are worshiping satanic power. Certainly, this power is operating the universe.

The king of this world is MUNN (men of era). He is very cruel and powerful. None of the creatures born in this world can defeat them. If this holy soul is living inside this organism, then why are these loopholes, sins, injustice, tyranny and dirty work happening? This is not our soul; neither does the soul have any relation with these works. It means someone else is doing all this and we are all forced to do it according to his will.

After a little consideration, it shows that the strength is not compassionate; there is also lack of coercion. As an example, there is no pardon in anger. There is no idea in greed. There is no sense in the ego. Whenever a person is angry, then he can not expect that he will have mercy. It can not be expected from greed that somebody will do good deeds. The egoist can not expect that he will show the simplicity. After all, where did such badness come from? Where are they sitting secretly? Who is operating them? Where are they being born?

Kabir ji says that all these disorders have a mind to create. Every creature in the world is imprisoned in the cage of MUNN. The MUNN equipped with the five disorders is residing in our interaction. This is misleading us and we are all following it. We are not able to see it as well. It can be easily judged how powerful this is. Sometimes we also say in the language of colloquial language that all of us are entangled in the traps of MUNN and Maya. But we are not trying to know it seriously.

शैतानी ताक़त

कबीर साहिब ने कहा कि इस जीव को बहुत खतरनाक और ताक़तवर रूपी शक्ति जिसका नाम मन है, ने जकड़ रखा है। जीव की आत्मा निर्मल, दयालु और विकारों से रहित है। शास्त्रों में आत्म तत्व की व्याख्या लिखी है। यह स्त्री भी नहीं और पुरुष भी नहीं है। यह मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार और पाँच विकारों क्रमशः काम, क्रोध, लोभ,मोह और अहंकार से भी परे है। यह नित्य है, अपरिवर्तनशील है, अजर, अमर और अविनाशी है। इसका किसी भी काल में नाश नहीं हो सकता है। यह शांत और स्थिर है। यह गम्भीर है। यह सभी विकारों से रहित है। यह अजन्मा है।

इस शरीर में इतने विकार कहाँ से आ गए। ये हमारे शरीर में कहाँ पर स्थित हैं। ये कहाँ से अपना काम कर रहे हैं। जरूर कोई गड़बड़ है। लगता है कुछ खतरनाक ताक़तें इस शरीर में काम कर रही हैं। बाकायदा उनका जोर भी चल रहा है और उनकी ताकत हर जीव में समान रूप से अपना काम कर रही है। इस संसार के सभी जड़ और चेतन पदार्थ इसकी मार की जड़ में आ रहे हैं। कथाओं में भी हमको इसके प्रमाण मिल रहे हैं। इसका मतलब जो ताक़त हम सबको प्रभावित कर रही है वह बहुत शक्तिशाली है। यही ताक़त जब अपना खेल दिखाकर संसार के कई लोगों को मार देती है तो हम कहते हैं यही भगवान की इच्छा होगी। लगता है हम शैतानी ताक़तों की उपासना कर रहे हैं। निश्चित रूप से यही ताक़त ब्रह्मांड का संचालन कर रही है।

इस संसार के राजा काल पुरुष हैं। वह बहुत क्रूर और शक्तिशाली हैं। इस संसार में पैदा होने वाला कोई भी जीव उनको परास्त नहीं कर सकता। यदि इस जीव के अंदर यह पवित्र आत्मा रह रही है तो फिर ये छल, पाप, अन्याय, अत्याचार और गंदे काम क्यों हो रहे हैं। यह तो हमारी आत्मा नहीं कर रही है और न ही आत्मा का ये कामों से कोई संबंध है। इसका मतलब कोई और है जो यह सब करा रहा है और हम सब उसकी इच्छानुसार करने को मजबूर हैं।

 थोड़ा सा विचार करने पर पता चलता है कि वह ताक़त दयालु नहीं है उसमें शहनशीलता की भी कमी है। उदाहरण के रूप में क्रोध में क्षमा नहीं है। लोभ में विचार नहीं है। अहंकार में शीलता नहीं है। जब भी आदमी क्रोध करता है तो उससे अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह दया करेगा। लोभी से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि ये कोई सत्कर्म करेगा। अहंकार करने वाले से ये उम्मीद नहीं कि जा सकती कि वह सादगी का प्रदर्शन करेगा। आखिर ये इतने दुर्गुण कहाँ से आ गए। ये कहाँ पर छिपकर बैठे हैं। इनका संचालन कौन कर रहा है। कहाँ से इनकी उतपत्ति हो रही है।

कबीर जी कहते हैं इन सब विकारों को उत्पन्न करने वाला मन है। संसार का प्रत्येक जीव मन के पिंजरे में कैद है। पांचों विकारों से सुसज्जित मन हमारे अन्तःकरण में निवास कर रहा है। यह हम सबको भ्रमित कर रहा है और हम सब इसका अनुसरण कर रहे हैं। हम चाहकर भी इसको देख नहीं पा रहे हैं। सहजता से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह मन कितना शक्तिशाली है। कभी- कभी हम आम बोलचाल की भाषा में कहते भी है कि हम सब मन और माया के जाल में उलझे हुए हैं। लेकिन गम्भीरता से इसको जानने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।

..............ओम सत्य साहिब...............

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