Devotee and God

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A devotee asks his master (guru), can God be under the devotee? Master said it is true. Lord Krishna has also accepted this truth while imparting knowledge of Bhagavad Gita.

To give an example of this, he told the story of one of his disciples that some time ago an old devotee used to come in the temple everyday situated in the hermitage (ashram).

One day he was returning home with a depressed heart as the ashram was closed. On the way, he saw a picture of his god at a shop on the way and thought he would buy this picture but due to not being a shopkeeper in the shop, he secretly took the picture and started walking to his house.

God poster

As he walked, he started thinking that did he inadvertently commit any crime by stealing the picture? To find the answer to this doubt, a fight started between his mind and soul.

The heart says you have not done good deeds! The mind says no deeds (karma) are good or bad. The soul says will you worship your god with that stolen picture?

The mind says whether the picture is stolen or bought, what difference it makes. The soul says that you are pretending in the name of worship. What are you thinking; will you get God by worshiping the stolen picture?

The mind says why you are in a mess of these things; come to your house, no one has seen you stealing a picture.

The soul says that no one has seen you stealing, but God is watching everyone and don’t you know that you stole the picture from the shop? Instead of just a picture of fifty rupees, you sold your faith, religion and conscience?  For the sake of God, devotees sell themselves and you want to become a devotee by robbing that poor shopkeeper?

Gradually the mind also started agreeing with the soul and both started saying that you have committed a great sin.  Atonement for it now, otherwise the result of this deed will have to be suffered in old age and old age will be passed with great grief.

The mind said that if you go back to return this picture, people will call you a thief. The shopkeeper will beat you a lot, maybe he can hand you over to the police. The soul began to say that whatever it is, either return this picture to the shopkeeper or pay cost. Thinking that, he went to the shop to return the picture.

On reaching the shop, he started saying that he has stolen the picture from your shop and he is your criminal. Now, whatever punishment you give, he will accept it.

The shopkeeper said that you are like my younger brother. What will i punish you!  God has power of forgiving and punishing.

The shopkeeper said that when you stole the picture, your money fell here and this money is ten times more than the value of this picture. You came to rob me and robbed yourself.

The shopkeeper said that who can rob anyone without the will of God. The devotee started saying that he do not want his money back, keep all this money and happily returned to his house with that picture.

On reaching home, he placed the picture of God on a high place and devotion to him daily with great love.

He cleans that picture before his bath, offers food to the God before eating, and makes the God sleep before sleeping. Thus his love continued to grow day by day.

One day there was a very strong thunderstorm. Suddenly when a gust of wind came into his house, the picture of God fell on the ground. Seeing this, the devotee started thinking that his God must have got hurt due to the fall and he started crying and he started caressing the picture. This incident made him very upset due to which he fell ill.

His son used to live in the house, the son explained a lot that the picture cannot be hurt, you have confusion. Do not disturb yourself without reason; otherwise it will be difficult to improve your health. The son’s advice had no effect on him and he started calling the doctor. The boy thought he would call the doctor and check his mind too. He went to call the doctor.

The doctor asked the devotee what was wrong with you. The devotee started saying that my God has fallen and he has been hurt. Please check. The doctor said that you are spoiling my time by calling unnecessarily, how can the picture be hurt even in which there are no lives. The son of the devotee said that the father’s wish should be fulfilled so that his doubt may erase.

The doctor was surprised as soon as he put his stethoscope on the picture. The sound of the heart was coming from the picture. Even the doctor could not believe the incident.

The devotee’s values ​​do not decrease; the devotee’s trust not broken. In order to keep the respect of the devotee, the Lord resided in the picture and the incident of being a god in the control of the devotee became true.

भक्त और भगवान

Devotee’s love

एक भक्त अपने गुरु से पूछता है कि क्या भक्त के वश भगवान हो सकते हैं?  गुरु ने कहा कि यह सत्य है। भगवान कृष्ण ने गीता का ज्ञान देते समय इस सच्चाई को स्वीकार भी किया है।
उन्होंने इसका उदाहरण देने के लिए अपने एक शिष्य की कथा सुनाते हुए कहा कि कुछ समय पूर्व एक बूढ़ा भक्त प्रत्येक दिन आश्रम में स्थित मंदिर के दर्शन करने आता था । एक दिन आश्रम बन्द होने के कारण वह निराश मन से अपने घर लौट रहा था । चलते-चलते रास्ते में एक दुकान पर उसे अपने भगवान की तस्वीर दिखाई दी । उसने सोचा इस तस्वीर को खरीद लेता हूँ लेकिन दुकान में दुकानदार न होने के कारण उसने चुपके से तस्वीर उठाई और अपने घर को चल दिया ।

चलते-चलते वह सोचने लगा कि क्या तस्वीर चुराकर उसने कोई अपराध तो नहीं किया? इस संशय का उत्तर पाने को उसके मन और आत्मा के बीच एक लड़ाई सी शुरू हो गई।

मन कहता है तुमने अच्छा कर्म नहीं किया! दिमाग कहता है कोई कर्म अच्छा या बुरा नहीं । आत्मा कहती है कि क्या तुम उस चोरी हुई तस्वीर से अपने भगवान की पूजा करोगे?

दिमाग कहता है चाहे तस्वीर चोरी की हो या खरीदी हुई, इससे क्या फर्क पड़ता है। आत्मा कहती है कि तुम पूजा के नाम पर ढोंग कर रहे हो। तुम क्या सोच रहे हो,चोरी की तस्वीर की पूजा करने से क्या तुमको भगवान मिल जाएंगे?

दिमाग कहता है कि क्यों इन बातों के चक्कर में पड़े हो, अपने घर चलो, किसी ने तस्वीर चुराते हुए थोड़ी देखा है।

आत्मा कहती है कि चाहे किसी ने तुमको चोरी करते हुए नहीं देखा पर ईस्वर तो सब देख रहा है । और क्या तुम नहीं जानते कि तुमने दुकान से तस्वीर को चुराया है ? मात्र पचास रुपये की तस्वीर के बदले तुमने अपना ईमान, धर्म, जमीर सब कुछ बेच दिया ? भगवान के लिए तो भक्त अपने को तक बेच देते है और तुम उस गरीब दुकानदार को लूटकर भक्त बनना चाहते हो?

धीरे-धीरे दिमाग भी आत्मा से सहमत होने लगा और दोनों कहने लगे कि तुमने बहुत बड़ा पाप कर दिया है। इसका प्रायश्चित अभी कर ले वरना इस कर्म का फल बुढ़ापे में भोगना पड़ेगा और बुढ़ापा बड़े दुःख के साथ कटेगा ।

दिमाग ने कहा कि यदि तुम इस तस्वीर को वापस देने गये तो लोग तुमको चोर कहेंगे। दुकानदार तुमको बहुत पीटेगा, हो सकता है वह तुमको पुलिस के हवाले कर दे। आत्मा कहने लगी कि चाहे जो भी हो, या तो इस तस्वीर को दुकानदार को वापस करो या तस्वीर के पैसे दो। यह सोचते-सोचते वह तस्वीर वापस करने को दुकान को चल पड़ा।

दुकान पहुँचकर वह कहने लगा कि मैंने तुम्हारी दुकान से तस्वीर चुराई है। मैं तुम्हारा गुनहगार हूँ। अब चाहे आप मुझे जो भर सज़ा दो, मुझे स्वीकार्य होगा। दुकानदार ने कहा कि तुम मेरे छोटे भाई के समान हो। मैं तुमको क्या सज़ा दूंगा। सज़ा देने और माफ करने का काम तो ईस्वर का है

दुकानदार बोला कि जब तुमने तस्वीर चुराई थी तो तुम्हारे पैसे यहीं गिर गए थे और यह पैसे इस तस्वीर के मूल्य से दश गुना ज्यादा हैं। तुम मुझे लूटने आये थे और खुद को लुटवाकर चल दिये। दुकानदार कहने लगा कि ईश्वर की ईच्छा के बिना भला कौन किसी को लूट सकता है। भक्त कहने लगा कि मुझे अपने पैसे वापस नहीं चाहिए। ये सारे पैसे तुम रख लो और उस तस्वीर को लेकर वह खुशी-खुशी अपने घर को चल दिया।

घर पहुंचकर उसने भगवान की तस्वीर को ऊंची जगह पर लगा दिया और बड़े प्रेम भाव से प्रतिदिन उनकी भक्ति करता रहा। वह अपने नहाने से पहले उस तस्वीर को साफ करता, भोजन करने से पहले भगवान को भोजन अर्पित करता, सोने से पहले गुरु को सुलाता। इस प्रकार उसका प्रेम दिन प्रतिदिन बढ़ता चला गया।

एक दिन बहुत तेज़ आंधी चल रही थी। अचानक हवा का एक झोंका उसके घर में आने पर भगवान की तस्वीर जमीन पर गिर गयी। यह देखकर भक्त सोचने लगा कि गिरने के कारण उसके भगवान को चोट लग गई होगी और वह तस्वीर को देखकर रोने लगा और तस्वीर को सहलाने लगा। इस घटना ने उसे बहुत विचलित किया जिस कारण वह बीमार पड़ गया।

घर में उसका बेटा रहता था, बेटे ने बहुत समझाया कि तस्वीर को चोट नहीं लग सकती, तुमको भृम हो गया है। आप बिना वजह अपने को परेशान न करो वरना तुम्हारी तबियत में सुधार होना मुश्किल होगा। बेटे की बात का उन पर कोई प्रभाव नहीं हुआ और वह डॉक्टर को बुलाने को कहने लगे। लड़के ने सोचा इस बहाने डॉक्टर को बुलाकर इनके दिमाग की भी जांच कर देता हूँ और वह डॉक्टर को बुलाने चल दिया।

डॉक्टर ने भक्त से पूछा कि आपको क्या परेशानी है? भक्त कहने लगा कि मेरे भगवान गिर गए हैं और उनको चोट लगी है। कृपया करके आप जांच करें। डॉक्टर ने कहा कि बेवजह बुलाकर आप लोग मेरा समय खराब कर रहे हैं तस्वीर को भी भला चोट कैसे लग सकती है जिसमें प्राण न हों। भक्त के बेटे ने कहा कि पिता जी की इच्छा को पूरा कर दीजिए ताकि इनका भृम मिट जाये।

डॉक्टर ने अपना आला जैसे ही गुरु की तस्वीर पर लगाया वह आश्चर्यचकित रह गए। तस्वीर में भगवान के दिल के धड़कने की आवाज़ आ रही थी। डॉक्टर को भी इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा था।

भक्त का मान न घट जाए, भक्त का विश्वास न टूट जाये। भक्त की लाज रखने को भगवान ने तस्वीर में वासः कर लिया और भक्त के वश में भगवान होने की घटना सत्य हो गई।


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