Falling Level of Devotion

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Falling Level

At present, seeing the level of devotion, it is seen that deceit is at the peak level. Describe the first class by telling the mantra, expressing your desire to be happy, and accepting the money in the satsang, pricing according to the seats in front and rear.. This can not be the work of God, but it can be called a business.

Such examples of great men get preceded. He never took any money from anyone to give true knowledge to the people. Presently the nature of devotion seems contaminated by seeing concentration. Here devotees are being told that if you sacrifice  few money, then all your sins will be eliminated, so he is going to commit sin because he knows that one day he will get rid off all the sins by spending a little money.

We must honestly look at the present form of devotion. What ambitious people have done to this devotion today? No man wants to get the kind of torture that great man ( saint of different relegion ) first got when talking about truth and to show the truth to the society. The great men did not get out of the way of truth, because of which they also had to face tough hard sentences. But they remain firm on the truth. They did not leave the truth He continued to hurt the system on the bases and false. For this reason, they were abused.

It means that even in ancient times, this devotional region was bound by notorious powerful people too. All these things are visible to us even today. Presently, devotion has been formulated. This businessman has come in the hands of the people. It appears that through such publicists religious fanatics and frenzy have come into the devotion area. This world is confused by imagining different forms of God.

Kabir Sahib said that we all are alike. The organs of our body are made of similar things.What basis can we say each other differently? Seeing this arrangement, he said that we are all confused somewhere. That is why they have to suffer a lot in speaking their truth in their time. There is no one to question the system today.

Today those who are literary, authors, intellectuals, they are not able to raise the courage to uncover the truth. To not uncover the truth, the society is also trying to maintain the status of a place in a way. Here, we are not trying to know where we are, why we have come here and where do we go back? What is the purpose of our lives that we get all the happiness and prestige of this world by becoming very rich? And finally leave empty hands back. In this world, there is no such person who does not have to suffer with happiness in life.

We have to think that what is the reason for our birth death? Why are we getting tortured again and again? If we reflect on this deeply, then we find that we are really lying in the hands of a cruel system. If someone lives in a prison and thinks that he enjoys pleasures and facilities, then it is not possible, because it is designed to punish. So if someone thinks that he will get happiness only in this world, then it is not so.

Hindi Translation-

वर्तमान में भक्ति के स्तर को देखने पर यह दिखता है कि छल कपट चरम स्तर पर है।मन्त्र बताकर प्रथम श्रेणी दिलाना, मन्त्र बताकर रहीस होने का ख्याब दिखाकर पैसे ऐंठ लेना, सत्संग में भी आगे और पीछे की सीटों के हिसाब से मूल्य निर्धारण हो गया है। यह परमार्थ के कार्य नहीं हो सकते, परन्तु इसको व्यवसाय जरूर कहा जा सकता है।

महापुरुषों के ऐसे उदाहरण पूर्व में मिल जाते है। उन्होंने लोगों को सच्चा ज्ञान देने के लिए कभी किसी से धन नहीं लिया। वर्तमान में भक्ति का स्वरूप एकाग्रता से देखने पर दूषित लग रहा है। यहां पर भक्तों से कहा जा रहा है कि यज्ञ करवा लोगे तो तुम्हारे सारे पाप समाप्त हो जाएंगे, इसलिए वह पाप करता ही जा रहा है क्योंकि उसको पता है एक दिन सारे पाप थोड़े पैसे खर्च करके समाप्त करवा लूंगा।

हमको ईमानदारी से वर्तमान की भक्ति के स्वरूप को देखना होगा। महत्वाकांक्षी लोगों ने आज इस भक्ति का क्या हाल कर दिया है। कोई आदमी यह नहीं चाहता कि जिस प्रकार सत्य की बातें करने ओर समाज को सत्य दिखाने पर पहले महापुरुषों को जो यातनायें मिली, उसको वह प्राप्त हों। वे महापुरुष सत्य की राह से नहीं हटे जिस कारण उनको कठिन कठिन सज़ाओं का सामना भी करना पड़ा। परन्तु वे सत्य पर अडिग रहे। सत्य को उन्होंने छोड़ा नहीं। वह गतल ओर असत्य पर आधारित व्यवस्थाओं पर चोट करते रहे। इस कारण उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ।

इसका सीधा मतलब ये है कि पुराने समय में भी इस भक्ति क्षेत्र को भी बाहुबली लोगों ने जकड़ा हुआ था। यह सब चीजें हमको आज भी प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रही हैं।वर्तमान में भक्ति संकृमित हो चुकी है। यह व्यवसायी लोगों के हाथों में आ चुकी है। ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसे ही प्रचारकों के माध्यम से धार्मिक कट्टरता ओर उन्माद भक्ति क्षेत्र में आ चुका है। परमात्मा के विभिन्न स्वरूपों की कल्पना करके इस संसार को भ्रमित करके रखा हुआ है।

कबीर साहिब ने कहा कि हम सब लोग एक जैसे है। हमारे शरीर के अंग भी समान चीजों के बने हैं।हम किस आधार पर एक दूसरे को अलग अलग कह सकते है? इस व्यवस्था को देखकर उन्होंने कहा कि हम सब कहीं न कहीं भ्रमित हैं। इसलिये उनको अपने समय में सत्य बोलने पर बहुत कष्ट झेलने पड़े। आज इज़ व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला कोई नहीं है।

आज जो लोग साहित्यकार है, लेखक है, बुद्धिजीवी है, वे भी सत्य को उजागर करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सत्य को उजागर न करना भी समाज भी एक तरह से भृम की स्तिथि को बनाये रखने का ही प्रयास है। यहां यह जानने की कोई कोशिश नहीं कर रहा कि हम कोन है, हम यहां क्यों आये हैं ओर हमको वापस कहाँ जाना है। हमारे जीवन का उद्देश्य क्या इतना ही है कि हम खूब अमीर बनकर इस संसार का सभी सुख और प्रतिष्ठा हासिल करें। ओर अंत में खाली हाथ वापस चले जायें। इस संसार में कोई ऐसा महीन जिसे जीवन में सुख के साथ साथ दुख न झेलने पड़ते हैं।

हमको यह विचार करना पड़ेगा कि हमारे जन्म मरण का कारण क्या है? हमको बार बार ये यातनायें क्यों मिल रही है? यदि हम इस पर गहराई से चिंतन करते हैं तो हमको पता चलता है कि हम सचमुच किसी क्रूर व्यवस्था के हाथों में पड़े हैं । यदि कोई जेल में रहकर सोचे कि उसे सुख ओर सुविधायें मिलें तो ऐसा सम्भव नहीं है, क्योंकि जेल को दण्ड देने के लिए बनाया गया है। इसलिए यदि कोई सोचे कि उसे इस दुनिया में केवल सुख ही मिलेगा तो ऐसा नहीं है।

................ओम सत्य साहिब.................

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