Inspiring Dohas by Sant Kabir

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Sant Kabir was a great revolutionary saint. He has vividly described his experiences on many aspects of life in his couplets. They have attacked the evil practices prevalent in all religions, creeds and classes. And have exposed the true nature of religion. For this reason, their couplets are still alive, inspiring and influential.

कबीर महान क्रांतिकारी संत थे । उन्होंने अपने दोहों में जीवन के अनेक पक्षों पर अपने अनुभवों का जीवंत वर्णन किया है । सभी धर्मों, पंथों, वर्गों में प्रचलित कुरीतियों पर उन्होंने मर्मस्पर्शी प्रहार किया है तथा धर्म के वास्तविक स्वरुप को उजागर किया हैं । इसी कारण उनके दोहे आज भी जीवंत एवं प्रभावोत्पादक हैं ।

जो छोरै तो आंधरा, खाये तो मरि जाये
ऐसे खान्ध छुछुन्दरी, दोउ भांति पछताये

JO CHOORE TOH AANDHARA, KHAYE TO MARI JAYE

ESEY KHANDH CHUCHUNDARI, DOU BHANTI PCHTAYE

यदि साप छछुंदर को पकड़ कर छोड़ देता है तो अंधा हो जाता है और खा लेने पर मर जाता है । वह दोनों ही भॅंति पछताता है। इसी प्रकार बुरे लोगों के साथ से पतन होता है और उन्हें छोड़ देने पर वे दुश्मन वन जाते हैं । कुसंगति से हर प्रकार से बुरा ही होता है ।


If the snake catches the mole and leaves, he becomes blind and dies after eating. He regrets both. In the same way, bad people fall with them and when they are released, they become enemy. Maladjustment is bad in every way.

सज्जन को सज्जन मिलै, होबै दो दो बात
गदहा सो गदहा मिलै, खाबै दो दो लात

SAJJAN KO SAJJAN MILAIN, HOBAIN DOH DOH LAAT

GADHA SO GADHA MILAIN, KHABAIN DOH DOH LAAT

जबदो भक्त पुरुष मिलते हैं तो परस्पर उन में प्यार भरी बातें होती है, पर दो गद्हे जब एक जगह मिलते हैं तो वे दोनों एक दूसरे को दुलत्ती मारते हैं ।

When two devout men meet, there is mutual love between them, but when two donkeys meet in one place, they both kick each other.

ज्ञानी को ज्ञानी मिलै, रस की लूटम लूट
ज्ञानी अज्ञानी मिलै, होबै माथा कूट

GYAANI KO GYAANI MILEY, RUS KI LOOTAM LOOT

GYAANI AGYAANI MILEY, HOVAIN MATHA KOOT

जब दो ज्ञानी परस्पर मिलते है तो उनमें ज्ञान एंव प्रेम रस की लूट होती है पर ज्ञानी और मूर्ख के मिलने पर उनमें सिर फोड़ने और माथा पीटने का काम होता है ।

When two knowledgeable people meet, they are robbed of knowledge and love. But after meeting the knowledgeable and foolish, there is the task of beating their heads and beating their foreheads.

हरिजन केवल होत है, जाको हरि का संग
बिपति पड़ै बिसरै नहीं, छाड़ै चैगुन रंग

HARIJAN KEWAL HOAT HAI, JAAKO HARI KA SANG

VIPATTI PDEY BISREY NAHIN, CHAADEY CHEIGUN RANG

हरिजन उसे कहते ह्रैं जो भक्ति एंव सुमिरण द्वारा सर्वदा प्रभु के संग रहते है । विपत्ति एंव दुर्दशा के समय वे ईश्वर को नहीं भूलते हैं वल्कि उन पर प्रभु प्रेम का रंग चार गुणा बढ़ जाता है ।

Harijans call him who always stays with God through devotion and God’s praise. They do not forget God in times of calamity and plight, but the color of the Lord’s love increases four times on them.

जीवन जोवन राज मद, अविचल रहै ना कोये
जु दिन जाये सतसंग मे, जीवन का फल सोये

JEEVAN JEEVAN RAAJ MUDD, AVICHAL RAHEY NA KOYE

JU DIN JAGEY SATSANG MAIN, JEEVAN KA FUL SOYE

यह जमीन,यौवन,राजपाट,धन संपत्ति,अभिमान कुछ भी स्थायी नहीं है । किंतु जो दिन संतों के सत्संग में बीतता है वही जीवन का वास्तविक फल है ।

This land, youth, royalty, wealth, pride, nothing is permanent. But the day which is spent in good accompaniment of saints, is the real fruit of life.

चंदन जैसे संत है, सरुप जैसे संसार
वाके अंग लपटा रहै, भागै नहीं बिकार

CHANDAN JAISE SANT HAIN, SROOP JAISE SANSAAR

BAKEY ANG LAPTA RAHEY, BHAGAIN NAHI VIKAAR

संत चंदन की भाति होते है और यह संसार साप की तरह विषैला है । किंतु साप यदि संत के शरीर में बहुत दिनों तक लिपटा रहे तब भी साप का विष-विकार समाप्त नहीं होता है ।

Saints are like sandalwood and this world is poisonous like snake. But even if the snake remains wrapped in the saint’s body for many days, the venom disorder of the snake is not eliminated.

कोयला भी होये उजल, जरि बरि है जो सेत
मुरख होय ना उजला, ज्यों कालर का खेत

KOYLA BHI HOYE UJAL, JARI BARI HAI JO SET

MUKHAR HOY NA UJALA, JYON KALAR KA KHET

कोयला भी अच्छी तरह जल कर उजला हो जाता है परंतु मूर्ख कभी भी उज्जवल नहीं होता जैसे कि एक वंजर भूमि में बीज नहीं उगता है ।

Coal also burns well and become like wood ashes, but the fool is never bright, as if a seed does not grow in a barren land.

उजल बुन्द आकाश की, परि गयी भुमि बिकार
माटी मिलि भई कीच सो, बिन संगति भौउ छार

UJAL BUND AAKASH KI, PARI GAYI BHUMI BEKAR

MATI MILI BHAI KEECH SO, BIN SANGATI BHOU CHAAR

आकाश से गिरने वाली वर्षा की बूदें निर्मल और उज्जवल होती है किंतु जमीन पर गिरते ही गंदी हो जाती है । मिटृी में मिलकर वह कीचड़ हो जाती है । इसी तरह आदमी भी अच्छी संगाति के अभाव से बुरा हो जाता है ।

The drops of rain falling from the sky are pure and bright, but fall on the ground, it becomes dirty. That becomes mud in the soil. Similarly, man also becomes bad due to lack of good association.

 
 

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