Kabir Chieldhood Secreats

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There were 1484 disciples coming to the place named Kabir Chaura in Banaras. A siddha man should see some character of Kabir. Then one official said, we all worship idol and Kabir does nothing. The official said Kabir should give a job to us, that all the devotees who came here should have neem teeth in the morning. Kabir said alright,  Kabir went to a bush and said that all devotees who came here in the morning should have one neem teeth and then they went away to preach.

In the morning, the kamandalam of all the devotees was kept in one of the teeth. Now the official said, all the utensils should be cleaned in the morning.

kamandalam is an oblong water pot made of a dry gourd ( pumpkin) or coconut shell, metal, wood of the Kamandalataru tree, or from clay, usually with a handle and sometimes with a spout. Hindu ascetics or yogis often use it for storing drinking water.

Kabir is right, and in the morning he got up and started making urine over the pots. Some people went and told this to Guru Ramanand .

Ramanand came out of the cave and came to Kabir and said that there should be some limitations of the world. Kabir said I got an order to clean the utensils. Ramanand  said what urine? Kabir said it has created this creation. Then Kabir looked towards the sky and began to become very raining. All the things kept there have also been dusted and cleaned by water. All the saints, devotees,  started singing hymns. The sadhus said among themselves that this is a perfect man. Do not tease them.

A few days passed. Two or four saints should be seen to see some more leelaes. The official said Kabir, many devotees come to our ashram, due to which there is less milk daily. From now on you will manage milk. Kabir said, okay.

In the morning Kabir went to the banks of the Ganges and started burying the dead cows in one place and started fluttering the green grass on it. At 9 am the kitchen was ready at the ashram but Kabir did not bring the milk.

Everyone went out to find Kabir. A sadhu saw Kabir peeling grass on the Ganges coast and went and told Ramanand. Ramanand says you are surprised by me every day, and forward Ramanand towards the back and devotees walked towards the Ganges coast.

SwamI said, Kabir what are you doing here? The food is not being made in the kitchen if there is no milk. Kabir said I have called the Kamdhenu cow from the heaven. Looking at the bones, kabir said there are two to two and a half thousand people living in the  Ashram, the daily distribution of milk keeps alive, Come on Kamdhenu.  cow hunker got up and started eating doves of grass. And the milk was dripping from its thins.

Then Kabir came to the hermitage (Ashram)  with that cow and the lack of milk was fulfilled. People gave lots of slogans to Jai Kabir. Kabir revealed two cows, one in Niru’s house and another to the ashram.

After some days, the officer said, Kabir, you will worship today. Kabir said okay but all the idols will have to first Ganga river  bath. All the idols were taken to the Ganges coast and Kabir threw all the idols in the Ganges.

People said, Kabir what did you do? Kabir replied Deities had not plunge into the Ganges for a long time, so today they are diving with fun. Kabir said, “How is he floating on Ram  and towards Krishna?” Hanuman is also taking a lot of dip.

Call him Swami  call him, Kabir called everyone and all the gods, including the make-up, sat down on the throne. Kabir said, Look, there is no difference in his makeup. Those who hated Kabir in Kasi Nagar, were stunned after seeing this incident. Seeing this Leela people gave Kabir a lot of praise.


हिंदी अनुवाद —–

बनारस के कबीर चौरा नामक स्थान पर 1484 चेले आये हुए थे। एक सिद्ध पुरुष बोले कबीर के कुछ चरित्र देखने चाहिए।तब एक अधिकारी बोला, हम सब मूर्ति पूजा करते है और कबीर कुछ नहीं करते। अधिकारी बोला कबीर को जी हमको एक काम सौंपते है वो यह कि यहां आए सभी भक्त जनों के पास सुबह नीम का दातून होना चाहिए। कबीर बोले जी ठीक है। कबीर जी जाकर एक झाड़ी के पास जाकर बोले सुबह सुबह यहां आए सभी भक्तजनो के पास एक दातून होना चाहिए और इतना कह फिर उपदेश देने चले गये। सुबह सब भक्तजनों के कमण्डल मैं एक एक दातून रखा हुआ था। अब अधिकारी बोला सुबह सारे बर्तन साफ होने चाहिए। कबीर बोले ठीक है और सुबह उठकर बर्तनों के ऊपर पेसाब करने लगे। कुछ लोग ने जाकर यह बात गुरु रामानंद जी को बताई। रामानंद गुफा से निकलकर कबीर के पास आये और बोले संसार की कुछ मर्यादा भी रखनी चाहिए। कबीर बोले मुझे बर्तन साफ करने का आदेश मिला है। रामानंद जी बोले तो क्या पेशाब से ? कबीर बोले पेसाब से तो ये सृष्टि पैदा हुई है। तब कबीर ने आसमान की तरफ देखा और भयंकर बरसात होने लगी। वहाँ रखी सभी चीज़ें पानी से धूल भी गयी और साफ भी हो गयीं। सब साधू भक्तजन कबीर जी जयजयकार करने लगे। आपस में साधुओं ने कहा ये सिद्ध पुरुष है। इनको मत छेड़ो। कुछ दिन ओर बीत गए। दो चार साधू बोले अधिकारी जी कुछ और लीलायें देखनी चाहिए। अधिकारी बोले कबीर हमारे आश्रम मे बहुत भक्तगण आते है जिस कारण रोज़ दूध कम पड़ जाता है। अबसे आप ही दूध की व्यवस्ता करोगे।  कबीर बोले ठीक है, सुबह होते ही कबीर गंगा के किनारे गए और मरी हुई गायों की हड्डियों को एक जगह पर जमा करने लगे और उसके ऊपर हरी घास की दूब को झाड़ने लगे। उधर आश्रम में सुबह 9 बजे रसोई तैयार हो गयी पर कबीर दूध नही लाये थे। सब लोग कबीर को ढूंढने निकल पड़े। एक साधू ने गंगा तट पर कबीर को घास छीलते हुए देखा और जाकर रामानंद जी को बता दिया। रामानंद बोले तुम मुझे रोज़ हैरान करते हो, ओर आगे आगे रामानंद ओर पीछे पीछे भक्तगण गंगा तट की ओर चल दिये। स्वामी जी बोले कबीर यहां क्या कर रहे हो ? रसोई में दूध न होने पर खाना नहीं बन रहा है।कबीर बोले बैकुण्ठ से कामधेनु गाय को बुलाया है। हड्डियों की तरफ देखकर कबीर बोले आश्रम में दो से ढाई हजार लोग रहते है,दूध की परेसानी हर रोज़ रहती है, आओ कामधेनु उठो। एक गाय हुंकार भरकर उठी और घास की दूब खाने लगी। और उसके थन से दूध टपकने लगा। तब कबीर उस गाय को लेकर आश्रम आ गए और दूध की कमी पूरी हो गई। लोगों ने जय कबीर के खूब नारे लगाए। कबीर ने दो गायों को प्रगट किया, एक को नीरू के घर मे ओर दूसरे को आश्रम मैं।  कुछ दिन ओर बीते तो अधिकारी बोले कबीर आज तुम पूजा करोगे। कबीर बोले ठीक है पर सभी मूर्तियों को पहले गंगा स्नान कराना पड़ेगा। सभी मूर्तियों को गंगा किनारे ले जाया गया और कबीर ने सभी मूर्तियों को गंगा में फेंक दिया। लोग बोले कबीर ये क्या किया तुमने ? कबीर बोले देवताओं ने बहुत समय से गंगा में डुबकी नही लगाई थी, इसलिए आज मज़े से डुबकी लगा रहे हैं। कबीर बोले देखो वह राम जी को ओर कृष्ण जी को कैसे तैर रहे हैं। हनुमान जी भी बहुत डुबकी लगा रहे हैं। स्वामी जी बोले बुलाइये उनको। कबीर ने सभी को पुकारा ओर श्रृंगार सहित सभी देवता सिंहासन पर आकर बैठ गए। कबीर बोले देखिये गुरु जी इनके श्रृंगार में कोई फर्क नहीं है। कासी नगरी मे जो लोग कबीर से नफरत करते थे, वे इस घटना को देखकर दंग रह गए। यह लीला देखकर लोगों ने कबीर की बहुत जयजयकार की।

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