Kabir Preach Mohammad

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Satguru Kabir Preach Mohammad came from Purushottampuri to Brahmadesh. There he met Parshuram. Parasurama had two queens. One was named Bhana and the second was Mussira. Satguru taught the lesson of salvation to her there but queen Bhana did not concentrate on preaching. She went to hell and found him a body of radiant in the next life.

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Kabir Preach Mohammad moved towards western countries from Burma. There he met Muhammad and gave him fifth Namaz and traveled to the fort. He went to Mecca from there and gave him knowledge of wisdom. The way Namaz was praying, they fell on their feet and lay down. The Mujagar came and saw a madman lying down. He grabbed his thumb and twisted it. But on the same side, even the foot would rotate, the mosque would also be there. He saw Kabir twirling it three – three times. Now he was scared and he used to adore.

Kabir came to the coast of red sea after meditation from there. An old lady came there and started crying in front of them. On asking the old lady said that at this place, her boy has been drowned in the boat along with her daughter and daughter-in-law. It has been almost forty years. He said, oh oh old lady, if you will worship Satynam, then your boy will come out with a boat and become disappear from that place.

Now old lady continued to chant Satynam.  One day her boy came out from the sea with the boat. She was very happy. Kabir appeared and  preached the teachings of salvation. In the western country, even today, his four pillars are worshiped by Sekh Kabir, Sayyed, Ahmed Kabir.

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हिंदी अनुवाद—–

सतगुरु कबीर पुरुषोत्तमपुरी से ब्रह्मदेश को पधारे। वहां परशुराम मिले। परशुराम की दो रानियाँ थीं। एक का नाम भाना और दूसरी का नाम मुसिरा था। सतगुरु ने वहाँ उपदेश दिया पर भाना रानी ने नहीं माना। वह नरक को गयी ओर उसको अगले जन्म में चमकादड़ का शरीर मिला।

सतगुरु ब्रह्मदेश से पश्चिम देशों की ओर गये। वहाँ मोहम्मद मिले। सतगुरु ने मोहम्मद को पाँचवा कलमा दिया ओर भिस्त की सैर कराये। सतगुरु वहाँ से मक्का गये और ज्ञान उपदेश दिया। वहाँ नमाज़ी जिस तरफ नमाज़ पढ़ रहे थे, वे उस तरफ पैर करके लेट गये। मुजागर ने आकर देखा और समझा कोई पागल व्यक्ति लेटा है। उसने उसके पैर का अँगूठा पकड़कर घुमा दिया। लेकिन वो जिस तरफ भी पैर को घुमाता, मस्जिद भी उधर को हो जाती। उसने सतगुरु को दो तीन बार घुमाकर देखा। अब वो डर गया और उसने सतगुरु को आदाब किया। सतगुरु वहाँ से अन्तर्ध्यान हो गये।

अन्तर्ध्यान होने के बाद सतगुरु लाल समुन्द्र के संगम पर आये। वहाँ एक बूढ़ी औरत आकर उनके सामने रोने लगी। पूछने पर बूढ़ी औरत ने कहा कि इसी जगह पर इसका लड़का बहू ओर बरातियों सहित नाव में डूब गया है। लगभग चालीस वर्ष हो चुके हैं।सतगुरु बोले, अरे ओ बुढ़िया, तू सत्यनाम का भजन करेगी तो तेरा लड़का नाव सहित निकल आयेगा।

बुढ़िया बोली, मैं सत्यनाम का भजन जरूर करूंगी। वह भजन करती रही। एक रोज़ उसका लड़का नाव सहित आ गया। बुढ़िया बहुत खुश हुई। सतगुरु प्रगट हुए और उन्होंने धर्म का उपदेश सुनाया। पश्चिम देश मे आज भी सेख कबीर सय्यद अहमद कबीर के नाम से उनका चौरा तकिया पूजा जाता है।

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