Kabir’s Arival

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Kabir was born in India was on top of a lotus flower on Lahartara pond in Varanasi, Uttar Pradesh state .he did not come from the womb of a human being. Mostly according to legend brightly power similar drop came on top of a circle lotus flower, which saw on a woman’s reflection of sky in water Neeru name, see nearby on sitting back power fireball from the sky look told her husband The fire lightened ball has fallen on the lotus flower and I see a small child on the lotus flower.

Neema quickly rushed to pick up the child, her husband became very angry. He said that we have no children yet people will ask who this child is, and will blame for theft. Let the child and come back home but Neeru have this child who has God due to our children not left bid child and say the husband she will not left chield. Some people saw the baby in Niru’s hands and they too came to them. Husband noor was very angry with the behaviour of wife. The crowd gathered too. They fell in love when the child said, do not leave me and take home, no one will say anything. Seeing such a small child, this thing spread throughout the city.

The crowd of people started coming home to Niru. People flower rains, few people pray the child. Neeru quote Today the child should feed the seven days of the day. Nima’s sister quickly adopted her in the bid. Chield spoke ,neither I eat food nor I m thirsty. They remained silent,. Noor decided that he would take this child to the famous religious leader of the city, Ramanand ji. At that time Ramanand ji had a crowd of devotees there. The watchman went to Ramanand ji and took the child and brought him noor. He does not drink milk that has been eaten seven days, his body is the same as it is, the face is shiny. Most speaks. Ramanand ji said that he is the incarnation of the person. Bring the cow’s baby, born seven days ago, and bring a pot from there to the potter. If that child is an incarnation of a person, then the milk of the cow will automatically get milk. The same milk will drink. When the milk came in front of the child, he said that I do not eat food, it is my food word. There too many Muslims came there, they said we will keep the name. Then the child said Kaji ji what will you name me, my name is Kabir. Who will call me Kabir, he will reach Satlok {Heaven} Then the Muslim people said, “The boy of this lowly below cast, what do we understand?” If Maulvi Sahib is eight days old then he will speak so much, then he will be very evil. All Muslims said kill it. After listening to this, Nour fell unconscious and Neema too lost consciousness. Then the maulvi does not accept our call from Noor, so first you will cut your neck and then kill this Kabir. Then Kabir said, Niru, do not be afraid that without the cleric gives punishment to the criminals, and the infidels call infidels. You do not understand the crime. As such, the Maulawi cut the throat of Kabir with the dagger in his hand, but as soon as the ascetic turns the neck throat again. After joining seventeen times, after cutting eighteen times, the dagger fell off the hand. Then maulvi spoke it is not the order of God. Kabir said, looking at his quoran, Kabir Kabir will be. Sub Muslim passed away and finally had to call Kabir. The mark of birth of Kabir is still present in Benaras (located in the state of Uttar Pradesh state of India) and there was a continuation of the arrival of people Because he has always been successful for humanity. He inspired people of all religions to rise above religion and walk on humanity.

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हिंदी अनुवाद —

कबीर का जन्म भारत स्थित उत्तर प्रदेश राज्य के बनारस शहर मे लहरतारा तालाब मे एक कमल के फूल के ऊपर हुआ ।वह किसी मनुष्य के गर्भ से नही आये। कथा के अनुसार आसमान से चमकते हुए बिजली के समान एक गोला कमल फूल के ऊपर आकर गिरा जिसे नीरू नाम की एक महिला ने पानी मे आसमान की परछाई मे आते देखा, देखते ही पास मे बैठे अपने पति को कहा देखो आसमान से बिजली का गोला आ रहा है वह गोला कमल के फूल के ऊपर आकर गिरा है और मुझे फूल के ऊपर एक छोटा सा बच्चा दिखाई दे रहा है। नीमा तेज़ी से जाकर बच्चे को उठा लायी, उसके पति को बहुत गुस्सा आया । उसने कहा हमारी अभी तक संतान नही है लोग पूछेंगे ये बच्चा किसका है और चोरी का इल्जाम लगा देंगे। इस बच्चे को यहीं छोड़ दो और वापस घर चलो ,पर नीरू ने बच्चे को नही छोड़ा बोली हमारी संतान न होने के कारण ईस्वर ने ये बच्चा दिया है और पति के कहने के बाद भी उसने बच्चे को नही छोड़ा। कुछ लोगों ने नीरू के हाथ मे बच्चे को देख लिया ओर वे भी उनके पास आ गए । पति पत्नी की आपस मे कहासुनी हो गयी। भीड़ भी जमा हो गयी। वे आस्चर्य मे पड़ गए जब बच्चा बोला मुझे मत छोड़ो ओर घर ले चलो कोई कुछ नही कहेगा। इतने छोटे बच्चे को बोलते देख ये बात पूरे शहर मे फैल गयी। लोगों की भीड़ नीरू के घर आने लगी । कोई फूल बरसाता तो कोई आरती उतारता। नीरू बोली आज बच्चे को सात दिन हो गए दूध पिलाना चाहिए। नीमा की बहिन ने जल्दी से गोद लिया बोली में पिलाती हूं। बच्चा बोला मे अन्न जल नही खाता मुझे प्यास नही है। वे चुप रह गए। नूर ने तय किया कि शहर के मशहूर धर्मगुरु रामानंद जी के पास इस बच्चे को लेकर जाता हूँ।

उस समय रामानंद जी के वहां भक्तो की भीड़ लगी थी। पहरेदार ने जाकर रामानंद जी से कहा वही बच्चा लेकर नूर आया है। वह सात दिन हो गए दूध नही पीता ,उसका शरीर भी ज्यों का त्यों है, चेहरा चमकदार है। सबसे बोलता है। रामानंद जी बोले वह ईस्वर का अवतार है। सात दिन पहले पैदा हुई गाय के बच्चे को लाओ ओर कुम्हार के वहां से एक बर्तन लाओ। अगर वह बच्चा ईस्वर का अवतार होगा तो गाय के बच्चे से अपने आप दूध निकलेगा। वही दूध पियेगा। जब बच्चे के सामने दूध आया तो वह बोला मे अन्न जल नही खाता मेरा भोजन शब्द है। वहां बहुत सारे मुस्लिम भी आये थे वे बोले इसका नाम हम रखेंगे। तब बच्चा बोला काज़ी जी आप मेरा क्या नाम धरोगे, मेरा नाम कबीर है । जो मुझे कबीर नाम से पुकारेगा उसे सतलोक पहुचा दूंगा। तब मुस्लिम लोग बोले ये नीच जुलाहे का लड़का हमको क्या समझता है इसको खत्म कर दो। मौलवी साहब बोले आठ दिन का है तब इतना बोलता है बड़ा हो जाएगा तो बहुत शैतानी करेगा। सारे मुस्लिम नूर से बोले ले खंजर ओर इसको मार। इतना सुनते ही नूर बेहोश हो गया और नीमा भी होश खो बैठी। तब मौलवी नूर से बोले हमारा हुकुम नही मानता है इसलिए पहले तेरी गर्दन काटूंगा फिर इस कबीर को मारूँगा। तब कबीर बोले नीरू तू डर मत ये मौलवी बगैर अपराध के सज़ा देता है और निअप्राधियों को काफ़िर कहता है। आपणास अपराध नही सूझता। ऐसा सुन मौलवी ने हाथ में लिए खंजर से कबीर का गला काट दिया पर आस्चर्य जितने बार गला काटता गला फिर जुड़ जाता। सत्रह बार जुड़ जाने के बाद जब अट्ठारह बार काटने लगा तो खंजर हाथ से गिर गया। तब मौलवी बोला ख़ुदा का हुक्म नही है। कबीर बोले अपनी कुरान देख सब कबीर कबीर हो जाएगी। सुब मुस्लिम परेसान होकर चले गए और आखिर कबीर नाम पुकारना पड़ा। कबीर के पैदा होने के निशान अब भी बनारस ( भारत के उत्तर प्रदेश राज्य मैं स्थित ) मे विद्यमान हैं तथा वहां लोगों के आने का सिलसिला लगा रहता है क्योंकि वह मानवता के लिए हमेसा प्रयासरथ रहे। उन्होंने सभी धर्म सम्प्रदायों के लोगों को मानवता पर चलने का मार्ग बताया।

 

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