Kabir’s Unique Dialog

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Sadguru Satyalok resident Satpurush, in the form of Sant Kabir, descended on a lotus flower in Varanasi lake. Listening to his teachings, large scholars, yogis, and intellectuals became unstoppable and dreaded.

Knowledgeable scholars of the scriptures thought of a solution to answer their questions. Why not ask questions in response to Kabir’s question. Everyone said yes, it will be fine. We will avoid self-mortification.

They prepared questions by consulting the people. Kabir has come to the Muslim home and according to Hindu religion, it is run. He has not created the master anyone yet. According to our religion, there can be no knowledge of initiation without a master. So we can answer them that their knowledge is wrong, therefore questions are also wrong.

Kabir used to teach only in the state of five years. From their point of view, it seems that they are only talking about what is written in the scriptures. He used to teach knowledge to Neeru Ali and Nima who raised their living in the house.

When they grew older, they started wearing garlands in their neck, Tilak, crown on their head with the peacock feather, Yogandand, Yagyopavit, and in feet wearing the wood slippers. Since their upbringing was getting the house of a Muslim, The ascetic began to say that you have made a vegan garment like Vaishnava people and it is wrong according to your religion.

He listened carefully to him and said, is religion a registry of any caste? I believe that religion is that which anyone can adopt, so that life can be smoothly live according to the rules. He gave an example, stating that Ratnakar was a robber and later he became sage Balmiki. You people ask me why I chant Ram’s name.

I ask you, have you forgotten the knowledge of your books? I think that you people are liars. Do not know the difference of the Vedas but read? The Sage is called Yogi. Go home and begging?  Beggar should ask him who is orphaned. However, your parents alive and do the work of orphans? Being a monk you use beans, hemp, and alcohol! Will you welfare society? Become a master and run away behind the money. Do not you know it is better to die than to ask? Do you know what religion is called? What is Ram? Is not there a Ram in Muslim?

The sages began to ask Kabir that tell who your master is? He said that I am the disciple of Ramanand and he is my master. Upon hearing this, some Brahmin disciples came to Ramanand and asked whether you have made Kabir a disciple?

Ramanand says I have never met till today. I think he is lying. Call him here right now, I ask. Kabir was teaching the people in front of the Vishwanath temple. Ramanand’s disciples said; let’s go to your master. They have called you. Kabir came with them and stood near Ramanand.

He was behind the curtain. He asked right there, when did I make you a disciple? Kabir said this morning when you came to bath in the ghat of Ganga river. Where did you meet? Kabir spoke on the ladder there in Manikarnika Ghat. Ramanand accepts that he went to the same place to take a bath in the morning, but I did not get it from you. Yes, there a very young child had cried by my feet stoke and then I lifted him in my lap.

He said, “I am the only child you saw and you had lifted up in the lap. That time you spoke “O Ram”.  At the same time, I had also found my master, and I also got a master’s education. They began to say that the child was too young but you are quite bigger than that. I am hearing your voice like a child of 8-9 years old? How do I assume that the child was you?

Kabir immediately took the form of a small child and began to say, just look, was this child? Ramanand said you were only but why do you say repeatedly that my master is Ramananda? The child said, then what should I call you? I have taken the name of Ram in your lap. Ramanand began to say that I can not accept you as a disciple.

Kabir argued that you do not believe or believe, I have accepted you as a master. What difference does it make? See, Dronacharya did not consider a single person to be a disciple, but he alone became a master. In the end, did Dronacharya have to accept him as a disciple? Did you believe that?

Ramanand came out of the curtain and embraced Kabir with his neck and said, “I did not make a disciple even if I made a disciple.” When the people heard it, they started calling Jai Kabir Jai Kabir. This talk turned out to be a kind of city. Neeru Neema too reached the ears and said, “We are blessed today.” Since then Kabir started living in the temple of Ramanand.

Baghel Dynasty

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हिंदी अनुवाद —–

सदगुरु सत्यलोक निवासी सतपुरुष ,संत कबीर के रूप में वाराणासी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल के ऊपर अवतरित हुए। उनके उपदेशों को सुनकर बड़े बड़े विद्वान, जोगी ओर सन्यासी उत्तर विहीन हो जाते और घबड़ाने लगते थे।

शास्त्रों के जानकार विद्वानों ने उनके प्रश्नों का जबाब देने के लिए एक उपाय सोचा कि क्यों न कबीर के प्रश्न के उत्तर में प्रश्न ही पूछा जाय। सबने कहा हाँ यह ठीक रहेगा। हम आत्मग्लानि से बच जाएंगे।

उन लोगों ने सलाह मशविरा कर प्रश्न तैयार किया। कबीर मुसलमान के घर आया है और चलता हिन्दू धर्म के अनुसार है।  उसने किसी को अभी गुरु नही बनाया है। हिन्दू धर्म के अनुसार बगैर गुरु से दीक्षा लिए ज्ञान नही हो सकता । इसलिए हम उनको जबाब दे सकते है कि उनका ज्ञान गलत है  इसलिये आपके प्रश्न ही गलत हैं।

कबीर सिर्फ पाँच वर्ष की अवस्था में ही उपदेश देते थे। उनकी बातों से लगता था कि वे शास्त्रों में लिखी बातों को ही कह रहे हैं।  वह घर में रहकर अपनी परवरिश करने वाले नीरू अली ओर नीमा को ज्ञान उपदेश देते थे।

कुछ बड़े होने पर वे गले मे माला पहनकर ,तिलक ,सिर पर मुकुट ओर मोरपंखी, हाथ मे सुमरनी, बाये हाथ मे योगदण्ड, जनेऊ  ओर पैरों मे खड़ाऊं पहनकर उपदेश करने लगे।

चूंकि उनकी परवरिश एक मुस्लिम के घर हो रही थी इसलिए कुछ  योगी सन्यासी  कबीर से कहने लगे कि तुमने वैष्णवों जैसी भेष भूषा बना रखी है और यह तुम्हारे धर्म के अनुसार गलत है?

कबीर जी ने ध्यान से उनकी बातें सुनी और कहने लगे कि क्या धर्म  किसी एक जात वर्ग  की रजिस्ट्री है? मैं मानता हूं कि धर्म वो है जिसको कोई भी धारण कर सकता है ताकि जीवन नियमों मे बांधा जा सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रत्नाकर एक डाकू था और बाद में वह ऋषि बाल्मीकि बन गया।  आप लोग मुझसे पूछते हो कि मैं राम के नाम को क्यों जपता हूँ?  मैं आपलोगों से पूछता हूं कि क्या आप लोग अपनी किताबों के ज्ञान को भूल गए हो ?  मुझको लगता है कि आप लोग मिथ्याचारी हो। वेद पढ़े हो पर भेद नही जानते?  साधु सन्यासी योगी कहलाते हो। भिक्षा लेने घर घर जाते हो। भिक्षा वह मांगता है जो अनाथ हो। तुम तो नाथ हो और अनाथ का काम करते हो ?  सन्यासी होकर भांग, गांजा ओर शराब के नशे मे रहते हो!!  तुम क्या समाज का कल्याण करोगे ? गुरु बनते हो और माया के पीछे भागते हो। तुमको नहीं मालूम कि मांगने से मरना अच्छा है? तुम क्या जानो धर्म किसे कहते हैं। राम क्या हिन्दू का है ? मुसलमान मे राम नही है ?

साधू कबीर से पूछने लगे कि बताओ तुम्हारा गुरु कौन है? उन्होंने कहा कि मैं रामानंद जी का चेला हूं और वे ही मेरे गुरु हैं। यह सुनकर कुछ ब्राह्मण चेले दौड़कर रामानंद जी के पास पहुँच गए और पूछने लगे क्या आपने कबीर को चेला बनाया है ?

रामानंद बोले  आज तक मेरी कभी कबीर सेे मुलाकात तक नही हुई है । वह झूठ बोल रहा है।  उसको यहां बुलाओ।  कबीर विश्वनाथ मंदिर के पास ब्राह्मण सन्यासियों को उपदेश दे रहे थे। रामानंद जी के चेले बोले, चलो चलो तुमको गुरु जी ने बुलाया है।  कबीर उनके साथ आये और रामानंद जी के पास खड़े हो गए।

चेले कहने लगे कि स्वामी जी हम कबीर को ले आये है। रामानंद  पर्दे के पीछे थे । उन्होंने पूछा बताओ हमने तुमको चेला कब बनाया ? कबीर बोले आज सुबह सुबह जब आप गंगा घाट मे नहाने आये थे। रामानंद बोले किस जगह मे ?  कबीर बोले मणिकर्णिका घाट मे सीढ़ी पर। रामानंद बोले हां  में सुबह सुबह स्नान करने उसी घाट पर गया था पर मै तुमसे तो नहीं मिला। हाँ वहां एक बहुत छोटा सा बच्चा मेरी खड़ाऊं की ठोकर खाकर रोया था ओर मैंने उसे गोद में उठा लिया था।

कबीर ने कहा मैं वही बच्चा हूं जिसे आपने रोता देख  गोद में उठा लिया था और आपने  हे राम कहा था। कबीर ने कहा उसी समय मुझे गुरु और गुरु दीक्षा भी मिल गयी थी ।  वे कहने लगे पर वह बच्चा तो बहुत छोटा था। तुम तो उससे काफी बड़े हो। मुझे तो तुम्हारी आवाज़ किसी 8 -9 वर्ष के बालक की तरह सुनाई दे रही है?  अब मैं कैसे मान लूं कि वह बच्चा तुम ही थे ?

कबीर ने तुरंत बच्चे का रूप बना लिया और कहने लगे क्या ऐसा था वो बच्चा ? रामानंद जी बोले तुम ही थे पर तुम बार बार ये क्यों कहते हो कि मेरे गुरु रामानंद जी है ? बच्चे ने कहा कि फिर में आपको क्या कहूँ ?  मैंने तो आपकी गोद मे बैठकर राम नाम लिया है ।रामानंद जी कहनेे लगे कि मैं तुमको चेला नही मान सकता। कबीर ने तर्क किया कि हे गुरुदेव आप मुझे चेला मानें या न मानें इसमें क्या फर्क पड़ता है ? देखिये एकलब्य को द्रोणाचार्य ने चेला नही माना पर एकलब्य ने उनको जबरदस्ती गुरु बना लिया। अंत में द्रोणाचार्य को उसे चेला मानना ही पड़ा ? बोलिये मानना पड़ा था कि नही ?

रामानंद जी पर्दे से बाहर आये और कबीर को गले से लगा लिया ओर बोले मैंने चेला बनाया तो भी ठीक ओर नही बनाया तो भी ठीक। जब लोगों ने सुना तो लोग जय कबीर जय कबीर पुकारने लगे। यह बात कासी नगरी मैं चर्चित हो गयी। नीरू नीमा के भी कान मे पहुँची ओर वे बोले आज हम धन्य हो गए। तबसे कबीर  रामानंद जी के मंदिर मे रहने लगे

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