Kind grace

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One day a farmer’s bull fell into the well. Due to not getting out of the well, he was shouting loudly. The farmer could not tolrate his pain. The farmer kept thinking for a long time what he should do and not, how to get it out. He went to the people of the village to help.

The farmer told the incident to the neighbors. Most of the neighbors also had the same opinion that there is no benefit to saving old and sick bull, so it would be appropriate to bury them there.

He came to the well with all the people and all the people started putting dirt into the well. The bull started crying loudly. He wanted to come out. All the people ignored old and helpless bulls and put the soil in the well. When the farmer peeped into the well, then he was surprised.

As people dug the soil over bulls, due to the rubbish of it, it would have gone down the soil and filled the well. Slowly the bull comes up due to the filling of the well. The bull thought that these people are helping to save it. Now he stopped crying.

Slowly the well were filled and the bull came out. Rather than burying the bull, his tactic saved the bull. He had regretted his actions.

जाको राखे साईयाँ मार सके कोय।
बाल न बांका सके जो जग बैरी होय।।
Kabir said that-
who can defend the good of God who protects himself. Bad people can’t harm him.

Inspirational Devotion

ईस्वर की दया-

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। कुंवे से बाहर न निकल पाने के कारण वह ज़ोर –ज़ोर से चिल्ला रहा था। किसान से उसकी पीड़ा देखी न गयी। किसान काफी समय तक विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। वह गाँव के लोगों के पास मदद के लिये गया।

किसान ने यह घटना पड़ोसियों को बताई। पड़ोसियों में से ज्यादातर लोगों की भी यही राय थी कि बूढ़े और बीमार बैल को बचाने का कोई लाभ नहीं है इसलिये उसको वहीं दफ्न कर देना ही उचित रहेगा।

वे सभी लोगों के साथ कुंवे के पास आया और सभी लोगों ने कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। बैल ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा। सब लोग बूढ़े और लाचार बैल की अनदेखी करके कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया….

जैसे जैसे लोग बैल के ऊपर मिट्टी गिराते, उसके छटपटाने के कारण वह मिट्टी नीचे होती जाती और कुंवा भरता जाता। धीरे धीरे बैल कुंवे के भरने के कारण ऊपर आता रहता। बैल ने सोचा कि ये लोग उसको बचाने में मदद कर रहे हैं। अब उसने रोना बन्द कर दिया था।

धीरे धीरे कुंवा भरता गया और बैल कुंवे से बाहर आ गया। बैल को दफनाने के बजाय उनकी युक्ति ने बैल को बचा लिया था। उनको अपने किये का पछतावा था।

जाको राखे साईयाँ मार सके न कोय।

बाल न बांका कर सके, जो जग बैरी होय।।

कबीर कहते है-

कहा जाता है कि जिसकी रक्षा खुद ईस्वर करता है भला उसको कोन मार सकता है ? बुरे लोग उसका कुछ भी नुकसान नहीं कर सकते।

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