Life goals

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A much famous Mahatma (Saint) in the village and city was lived with his disciple in a stone cave in a quiet area of ​​the forest. People from nearby cities and villages come there with problems, and he happily solved the problems of the people.

Hearing their popularity, some youth from far away city came to them with their problems. On seeing them, Mahatma respectfully asked him to come inside the cave and asked their problem.

The youth said that Mahatma, we have heard that you know the solution of every problem. Whoever comes to you, you satisfy them. That is why we have come here from far away cities with some similar expectations from you.

The Mahatma politely said that tell me your problem. The young man said that we have come to this city new and there is a lot of panic in the area where our house is.  There is a large population of stray people. While passing through the streets, people are abused. Some domineering people stand on the roadside drinking alcohol and misbehave people passing through the front. They not only abuses, but also scuffles with them while drunk. Now we are very upset, who would want to live in such a society, you tell me?


On hearing the young men, Mahatma woke up, and said that the problem is very serious, saying that he came out of the cave. The young man went outside and saw, he was standing calm and contemplating.

The next moment he said, will you do me one thing? The Mahatma said pointing away; there is a big Neem tree (Azadirachta indica tree) at some distance from here. You get some leaves for me from there.

Neem leaves

On getting the permission of the Mahatma, the young man stepped in, but the Mahatma stopped him and said, stay! Before you go, let me tell you, there are many stray dogs on the way, who can hunt you down, they are very dangerous, you can even die, and will you be able to bring those leaves?

The young men looked at the other, and seeing their facial expressions, the Mahatma understood that he was scared, but was ready to go there. The young men walked towards the forest. Going forward, they saw a large number of ferocious dogs.

They tried a lot to cross dogs, but this was not easy to do. As he passed close to a dog, the dog stared with hungry eyes biting him. They tried a lot to move forward, but doing it was like risking life.

After waiting for a long time, when they returned, Mahatma Saw, their hands were empty, and they were very scared. They came close to the Mahatma and said forgive us, this path is very dangerous, there were very  ​​dogs on the way, we could not do this work.

Mahatma went inside the cave and call disciple out. He asked the servant to break those leaves. The servant went through the same road. He passed through the dogs, but after a long time, the two young men saw the servant coming back from the forest and his hands were full of neem leaves.

Seeing this young man was shocked. Mahatma said, son, he is my servant, and is blind… Although he cannot see, but what is there, he has complete knowledge. He brings me Neem leaves every day.. And you know why stray dogs don’t bite him, because it doesn’t pay any attention to them. He only works by his own business.

Mahatma said, “Always remember one thing in life, the waste that you will pay the most attention to, the same thing will bite you.” So it would be good to keep your focus on your goal. Hearing this, the youths bowed down before the Mahatma. Now he had got a lesson, which he was going to remember for a lifetime.

Like these young people, we also experience something similar in our lives. Our life is also full of ferocious folds. Do not know at which point death will embrace us. But it only depends on us that, like those young men, we come back fearfully or like a servant to step forward with patience and courage, and achieve their goal.

जीवन के लक्ष्य

शहर और गांव में काफी चर्चित एक महात्मा जंगल के शांत इलाके में पत्थरों की गुफा में अपने शिष्य के साथ रहते थे। आसपास के शहर और गांव से लोग उनके पास अपनी समस्या लेकर आते, और वे ख़ुशी-ख़ुशी लोगों की समस्या का समाधान करते थे।

उनकी चर्चा सुनकर दूर शहर से कुछ नौजवान अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुंचे। महात्मा ने उनको अपने पास आता देख आदर से अन्दर आने को कहा और उनसे उनकी समस्या पूछी। नौजवानों ने कहा कि महात्मा जी हमने सुना है कि आप हर समस्या का समाधान जानते हैं। जो कोई भी अपनी समस्या आपके पास आता है संतुष्ट होकर जाता है। इसलिये हम भी आपसे कुछ ऐसी ही उम्मीद लेकर दूर शहर से आये हैं।

महात्मा ने विनम्रता से कहा कि तुम निश्चिन्त होकर मुझे अपनी समस्या बताओ। नौजवान बोला कि हम लोग इस शहर में नए आये हैं और जहां हमारा घर है, वहाँ के इलाके में बहुत दहशत का माहौल है। वहाँ आवारा लोगों की जनसंख्या काफी ज्यादा है। सड़कों पर गुज़रते हुए लोगों से बदतमीज़ी की जाती है, आते जाते लोगों को गालियाँ दी जाती है। कुछ दबंग लोग शराब पीकर सड़क किनारे खड़े हो जाते हैं और सामने से गुज़रते हुए लोगों के साथ बदसुलूकी करते हैं। वो ना सिर्फ गालियाँ देते हैं, बल्कि नशे में उनके साथ हाथापाई तक कर देते हैं। अब हम काफी परेशान हो गए हैं, भला ऐसे समाज में कौन रहना चाहेगा, आप ही बताएं ?

नौजवान की बात सुनकर महात्मा उठे, और बोले कि समस्या बहुत गंभीर है, वे यह कहते हुवे गुफा से बाहर आ गए। नौजवान ने बाहर जाकर देखा, वो शांत खड़े थे और चिंतन कर रहे थे।

अगले ही पल वो बोले,क्या तुम मेरा एक काम करोगे? महात्मा दूर इशारा करते हुए बोले, यहाँ से कुछ दूरी पर एक नीम का बड़ा पेड़ है। तुम मेरे लिए वहाँ से कुछ नीम के पत्ते तोड़ लाओ। महात्मा की आज्ञा पाकर नौजवान ने कदम बढ़ा दिए, परन्तु महात्मा उन्हें रोकते हुए बोले, ठहरो! जाने से पहले मैं तुम्हें बता दूँ, रास्ते में कई आवारा कुत्ते हैं, जो तुम्हें अपना शिकार बना सकते हैं,वो बहुत खूंखार हैं, तुम्हारी जान भी जा सकती है, क्या तुम वो पत्ते ला पाओगे?

नौजवानों ने दूसरे को देखा, और उनके चेहरे के हाव भाव देखकर महात्मा समझ गए कि वे डरे हुए तो थे, परन्तु वहाँ जाने के लिए तैयार थे। नौजवान जंगल की ओर चल दिए। आगे जाकर उनको काफी संख्या में खूँखार कुत्ते दिखायी दिए।

उन्होंने कुत्तों को पार करने की बहुत कोसिस की परन्तु यह करना आसान नहीं था। जैसे ही वो एक कुत्ते के करीब से गुज़रे, कुत्ते ने उन्हें काट खाने वाली भूखी निगाहों से घूरा। उन्होंने आगे बढ़ने की बहुत कोसिस की परन्तु यह करना जान जोखिम में डालने के बराबर था।

काफी देर इंतज़ार करने के बाद जब वे लौटे तब महात्मा ने देखा, उनके हाथ खाली थे, और वो काफी डरे हुए थे। वो महात्मा के करीब आये और बोले हमें माफ़ कर दीजिये ये रास्ता बहुत खतरनाक है, रास्ते में बहुत खूंखार कुत्ते थे, हम ये काम नहीं कर पाए।

महात्मा बिना कुछ बोले कुटिया के अन्दर चलते गए, और अपने नौकर को साथ लेकर बाहर आये। उन्होंने नौकर से वो पत्ते तोड़ने के लिए कहा। नौकर उसी सड़क से गया। वह कुत्तों के बीच से गुज़रा परन्तु जब काफी देर बाद, नौजवानों ने नौकर को सड़क से वापिस अपनी ओर आते देखा, तब देखा उसके हाथ नीम के पत्तों से भरे थे।

ये देखकर नौजवान भौचक्के रह गए। महात्मा बोले, बेटा ये मेरा नौकर है, और अंधा है… हालांकि ये देख नहीं सकता, परन्तु कौन सी चीज़ कहाँ पर है, इसे पूरा ज्ञान है। ये रोज़ मुझे नीम के पत्ते लाकर देता है.. और जानते हो इसे आवारा कुत्ते क्यों नहीं काटते, क्योंकि ये उनकी तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं देता। ये सिर्फ अपने काम से काम रखता है।

महात्मा आगे बोले, “जीवन में एक बात हमेशा याद रखना, जिस व्यर्थ की चीज़ पर तुम सबसे ज्यादा ध्यान दोगे, वह चीज़ तुम्हें उतनी ही काटेगी। इसलिए अच्छा होगा, तुम अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर रखो। ये सुनकर नौजवान महात्मा के आगे नतमस्तक हो गए। अब उन्हें एक सीख मिली थी, जिसे वो जीवन भर याद रखने वाले थे।

इन नौजवानों की तरह हम भी अपने जीवन में कुछ ऐसा ही अनुभव करते हैं। हमारा जीवन भी खूंखार मोड़ो से भरा होता है। न जाने कौन से मोड़ पर मौत हमें गले लगा ले। परन्तु यह सिर्फ हम पर निर्भर करता है कि, हम उन नौजवानों की तरह डरकर वापिस लौट आते है या फिर नौकर की तरह धैर्य और हिम्मत से आगे कदम बढाते हैं, और अपना लक्ष्य हासिल करते हैं।



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