Life to Kamaal and Kamali by Kabir

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The King Sikandar Lodhi and the Sekhtagi ji came to Jhansi fort, talking to Kabir. Then the accounting took Kabir over the fort and worshiped him in many ways. In front of Kabir, several types of food, nuts, dessert kept and said, eat, food, water. Kabir refused to eat things and said  anger, greed, attachment, ego, craving, anger, hatred, humiliation, hunger, thirst and sleep, these are the elements of Niranjan Brahma, not mine. Then the confusion of the Saikhtagi broke down. In the same time Sekhtagi saw the body of a  boy was seen flowing in the Ganga and in the presence of the Emperor, he said that the boy’s body is flowing in the river, give him life.

Kabir saw and said O boy, come here. The body of the boy started to swim and swim floating on the river and from there it came to the fort and came over the fort, The king said, “It is amazing!” Kabir said I will call you with a unique name. Then Kabir started to say a Kamaal and Kamaal Kabir. Now the Sekhtagi started adding to Kabir that one of my daughters had died at the age of seven, today he has been twelve years and there is his grave there, you make him alive. Kabir said your wish will be fulfilled. Take a walk in the tub and speak in the grave. Then Kabir, the emperor and his ministers and soldiers all reached the tomb, Kabir said, stand up the daughter of  Kabir. At that time the girl  stood up with the burial clothes. Let me say my talk, come, my beloved daughter, and hold the hand of the daughter by saying this. The girl saved her hand from literacy and said, ‘I have not come to call you but have raised in the name of Kabir. He is my father and I am his daughter. I will be with them. Sekhtagi become  discouraged.  Kabir named her Kamali.  Kabir speak to him ,  if there is any desire, tell me?.  Then peer Sekhtagi  said I am very grateful to you.  Kabir got disappeared. learning from Kabir, Sekhtagi praised Satyanam. Later, the people of Kamaal and Kamali known by the names of Kabir’s children.

Kabir Converted To Idol

हिंदी अनुवाद —-

बादशाह व सेखतगी जी कबीर से बातचीत करते हुए झूंसी किले मे पहुँचे। तब सेखतगी कबीर को किले के ऊपर ले गए और कई प्रकार से उनका पूजन किया। कबीर के सामने कई प्रकार का भोजन, मेवा, मिठाई लाकर रखा और कहा लीजिये खाइये, कबीर बोले में भोजन पानी इत्यादि चीज़ें नहीं खाता, काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, तृष्णा, राग, द्वेष, मान अपमान, भूख, प्यास ओर निद्रा ये सब निरंजन ब्रह्म के तत्व हैं , मेरे नहीं। तब सेखतगी  का भृम टूटा। इतने में सेखतगी ने गंगा में एक मरे हुए लड़के का शव बहते हुए देखा और बादशाह के सामने कबीर से बोले वह लड़के का शव नदी में बहता जा रहा है, उसे आप जीवनदान दीजिये।

कबीर ने देखा और बोले ओ कुमार, इधर आओ। लड़के का शव अब तैरने लगा और तैरते तैरते नदी किनारे आ गया और वहाँ से किले में आकर किले के ऊपर आ गया, बादशाह बोले ये तो कमाल हो गया। कबीर बोले हम तुमको कमाल नाम से पुकारेंगे। तब सेखतगी खुस होकर धन्य कबीर कहने लगा। अब सेखतगी हाथ जोड़कर कबीर से बिनती करने लगा कि मेरी एक लड़की सात वर्ष की उम्र में मर गयी थी, आज उसको बारह वर्ष हो गए और वहां उसकी कब्र है, आप उसको जिंदा कर दीजिए। कबीर बोले तुम्हारी इच्छा पूरी होगी। टब सेखतगी बोले कब्र मे चलिए। तब कबीर,  बादशाह और उनके मंत्री व सैनिक सभी लोग कब्र के पास पहुंचे, कबीर बोले उठजा कबीर की बेटी। तभी वह लड़की कब्र को तोड़ती हुई वही दफनाए हुए कपड़ों सहित उठ खड़ी हुई। सेखतगी बोले आओ मेरी प्यारी बेटी आओ ओर ऐसा कहकर बेटी का हाथ पकड़ लिया। लड़की ने सेखतगी से हाथ छुड़ाकर कहा मैं तुम्हारे बुलाने पर नहीं आयी हूं बल्कि कबीर के नाम से उठी हूँ, वो मेरे पिता हैं और मैं उनकी पुत्री।मैं उन्ही के पास रहूंगी। सेखतगी निरास हो गए। कबीर ने लड़की का नाम कमाली रख दिया। कबीर बोले सेखतगी और कोई इच्छा है तो बताइए। तब पीर जी बोले मैं कृतार्थ हुआ। कबीर अंतर्ध्यान हो गए, कबीर से शिक्षा लेकर सेखतगी सत्यनाम का भजन करने लगे। बाद में कमाल ओर कमाली को लोग कबीर के बच्चे नाम से जानने लगे।

14 Comments

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