People’s catagory

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In this world, we often find four types of people. First, there are people who deny the existence of God. They say that no one has seen the God, so that doesn’t exist. They make fun of the devotees and they consider him backward and uneducated. These people do not believe in spirituality and consider themselves to be smart and advanced. There is only one source to live their life that eats plenty and enjoy it. Nobody has seen anything. Therefore such people were called “Palmer” in spiritual language.

The second catagory of peoples are those who believe in God and do worship, charity, fast, Satsang, bhajan, kirtan and darshan tour etc. But more than their devotion, the worldly life continues to get things, these people don’t jokingly worship like Palmer people. Such people are called “Sansari” creatures.

The third types of people who believe in God and all his meditation are engaged in spirituality. They believe that this body has been found to be for the welfare of soul and for the service of the people of the world. Such people are called “Parmarthi” creatures.

Fourth generation people are “Great men”, who become great on the basis of their deeds and give them education and inspiration to live. The society accepts its admiration for such people. These people become more famous after death.

After Die?

Hindi Translation-

इस दुनिया मै प्रायः चार किस्म के लोग पाये जाते है। पहले वे लोग होते हैं जो ईस्वर के अस्तित्व को नकारते हैं। वे कहते है कि ईस्वर को किसी ने नहीं देखा है इसलिये वो है ही नहीँ। वो भक्ति करने वालों का मजाक उड़ा देते हैं और उनको पिछड़ा हुआ मानते है।

ये लोग अध्यात्म को नहीं मानते और अपने को एडवांस मानते है।इनके जीवन जीने का एक ही सूत्र होता है कि खूब खाओ पियो और मौज़ करो। किसी ने कुछ नही देखा है। शास्त्रीय भासा मै ऐसे लोगों को “पामर” कहा गया।

दूसरे किस्म के वे लोग है जो ईस्वर को मानते है और भक्ति, दान, व्रत,सत्संग, भजन, कीर्तन और दर्शन यात्रा इत्यादि भी करते है परंतु उनका ध्यान संसार की तरफ लगा रहता है ये लोग पामर लोगों की तरह भक्ति करने वालों का मज़ाक नही उड़ाते।  ऐसे लोगों को शास्त्रीय भाषा मै “संसारी” जीव कहा जाता है।

तीसरे किस्म के वे लोग होते है जो ईश्वर को मानते भी है और उनका सारा ध्यान आत्मकल्याण में लगा रहता है। वे मानते है कि ये शरीर ईस्वर प्राप्ति और आत्मकल्याण के लिए मिला है।  ऐसे लोगों को शास्त्रीय भाषा मै “परमार्थी” जीव कहा जाता है।

चौथे किस्म के लोग “महापुरुष” होते है, जो अपने कर्मों के आधार पर महान बनते है व लोगों को जीने की शिक्षा व प्रेरणा देते हैं। ऐसे लोगों को समाज अपना आराध्य स्वीकार करता है। ये लोग मरने के बाद और ज्यादा मशहूर हो जाते हैं।

 

 

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