Self Contemplation

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We all know the value of money that without all spheres of life we get very trouble without money and we need the money, so we know its importance very well, then only to earn it, night day every best efforts. But we do not know the importance of self-realization that it is unique happiness, it is infinite, it never decreases, like money decreases. It is unique in nature but it is unique.

Whenever we move towards that piety, many obstacles arise. Is our search lacking? First of all, see what human being is doing for doing enlightenment and salvation, and is it appropriate?

Whatever efforts the person is doing, he is treating him as right. He is doing yoga, he is saying that it is the best, who is doing the pilgrimage. He is saying that this is the best, one who is fulfilling the journey of temples, church, mosk so on…, he is saying that The best instrument that is doing . Yogi is saying that this is the most appropriate means that whatever point is on it, it is always considered to be eternal, should we let the means of achieving the permutations go like this?

We have to think that what is the proper way to make it easier to reach the soul and the divine. Should we remain on such beliefs?

Man has created many Gods for his own interests and selfishness and you will be able to make him a very divine person even further. The creation of these innovative new beings is the creation of the interests and interests of the human beings.

We must honestly think that what is the most suitable means of achieving God and what is the final path, because the one whom the person caught here has always believed him.

Some people are also saying that there is nothing let’s do enjoy. It is difficult to ascertain here that what is the most suitable means of obtaining it is that people are doing many actions and deeds, this is why various and the religions have been born.

Wherever the patient goes to the doctor, He does the process to know what the disease is. The second tries to know what the cause of the disease is. The third attempt is to relieve the disease. Unless the disease is detected, how will the cure?

Similarly, if our soul is in bondage, it is important to first know that what is the bondage is the factor of how it will be lost and what is the solution. One thing that is a thing of the past is the essence of religion, Is God inside you, then what is the distraction of the outside?

Kabir Sahib said Musk is in the belly belly of musk and he finds his fragrance out there. In this way the place of the person of the person is everywhere and within you . you are the temple of God, the innocent people do not know.

Kabir’s Arival


हिंदी अनुवाद —

आत्म चिंतन

हम सब लोग पैसे का महत्व जानते है कि जीवन के हर छेत्र मै बगैर पैसे के बहुत परेशानिया आती हैं और हमको धन की आवश्यकता पड़ती है इसलिये हम इसकी महत्वताओं को भली प्रकार समझते है तभी तो इसको कमाने पाने के लिए रात दिन भागीरथी प्रयास करते है परंतु आत्मदेव के महत्व को हम भली प्रकार जानते नही है कि यह अनूठा आनंद है यह अविरल है यह कभी घटता नही जैसे धन घटता है यह स्वरूपानंद अनूठा है परंतु जब भी हम उस परमतत्व की ओर बढ़ते है तो कई रुकावटें आ जाती है।क्या हमारी खोज मै कमी है? सबसे पहले ये देखते है कि मनुष्य आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए क्या क्या कर्म कर रहा है और क्या वह उपयुक्त है? जो भी जिस प्रयास को कर रहा है वो उसको सही मान रहा है।जो योग कर रहा है वो कह रहा है यही उत्तम है जो तीर्थ कर रहा है वो कह रहा है यही उत्तम है जो दान पूण्य कर रहा है वो कह रहा है यही उत्तम साधन है जो हठ्योग कर रहा है वो कह रहा है यही है सबसे उपयुक्त यानि जो भी जिस बिंदु पर है वह उसी को नित्य मान रहा है क्या हमको परमतत्व की प्राप्ति के साधनो को एसे ही चलने देना चाहिए?

हमको विचार करना ही होगा कि आखिर उपयुक्त रास्ता क्या है ताकि आत्मा और परमात्मा तक पहुँचना आसान हो जाये।क्या हम ऐसी मान्यताओं पर ही रहें? इन्सान ने अपने हितों और स्वार्थ के लिए बहुत से पर्मात्माओं का सृजन किया है और आप विस्वास करना आगे भी इन्सान बहुत परमात्मा बना देगा।ये नवीन नवीन पर्मात्माओं का जो सृजन किया जा रहा है इससे इन्सान के हितों और स्वार्थों की पुर्ति होती है। हमको यह ईमानदारी से विचार करना होगा कि परमात्मा को पाने का सबसे उपयुक्त साधन और आखरी रास्ता क्या है क्योंकि यहाँ जिसने जिसको पकड़ा है वो उसी को नित्य मान बैठा है कुछ लोग तो ये भी कह रहे है कि एक ही बात है। यहाँ पर निश्चय करना मुश्किल हो रहा है कि उसको पाने का सबसे उपयुक्त साधन क्या है लोग अनेकानेक क्रियाएँ और कर्म कर रहे है इसी से नाना मत और मतांतरों का जन्म हुआ है।

जब भी डॉक्टर के पास मरीज जाता है तो सबसे पहले डॉक्टर यह जानने की कोसिस करता है की रोग क्या है उसको जानने के लिए उसके पास संसाधन है ।दूसरा वह जानने का प्रयास करता है कि रोग का कारण क्या है तीसरा प्रयास वह रोग की निवर्ति का करता है और आखिर मै रोग दुबारा न होने का उपाय बताता है।जब तक रोग का पता नही चलेगा रोग कैसे मिटेगा? इसी प्रकार यदि हमारी आत्मा बंधन मै है तो सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि बंधन क्या है उसका कारक कोन है उसकी निवृति कैसे होगी और उपाय क्या है।लाख बात की एक बात है धर्मसास्त्रों का सार भी यही है वाड़ियों मै भी यही आ रहा है परमात्मा आपके अंदर है तो फिर बाहर का भटकाव कैसा? कवीर साहिब ने आम आदमी की भासा मे कहा कि कस्तूरी कुंडली बसे और मृग ढूंढे बन माय।ऐसे घट घट साईयां मूरख जानत नाही।….शाहीब बंदगी। कस्तूरी हिरन के पेट मे कस्तूरी होती है और वह उसकी खुसबू बाहर ढूंढता है इसी तरह ईस्वर का ठिकाना आपके भीतर है जिसे मूर्ख लोग नही जानते।

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