Sri Krishna Leela

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Leela can be loosely translated as the “divine play”. The concept of Lila is common to both non-duelist and duelist philosophical schools of Indian philosophy, but has a markedly different significance in each.

Shri Krishna was born in the world to destroy the wicked. Because the number of wicked people was very high. Therefore he got an idea in his mind to make work easier.

After the death of Kans, his father-in-law, Jarasandha, became very angry with Krishna. He attacked Mathura 17 times to kill Krishna and Balram. Each time he had to face defeat. To increase his power, he approached the kings of all the places, from crossing Shri Krishna.

After being a very powerful army, he again attacked Shri Krishna. But this time Shri Krishna killed all the soldiers and kings who came with him on the battlefield. Shri Krishna used to leave Jarasangha alive in the battle of each time.

Seeing this, Shri Krishna’s elder brother Balram asked why you always leave Jarsangh alive. He will again attack with the army.

Then laughing, Shri Krishna explained to Balramji that he should listen carefully to me. I leave Jarasandha intentionally and intentionally because this Jarasandha brings the evil people from all over the earth. He is doing the most important work for me and making my job easy. Because of that, I am able to easily eliminate all the wicked people living in the same place, or else I have to go all over the earth to kill these evil people. Do you tell me that he is not helping me like this?

Balram said that you are very sensible. Your policy must be appreciated. By saying this, Balram left from there.

In this way, Shri Krishna destroyed all wicked people of the world through Jarasangha.

Dwarikapuri and Sea Revenge


Hindi Translation-

श्री कृष्ण ने दुष्टों का विनाश करने के लिए संसार में जन्म लिया था। दुष्टों की संख्या बहुत ज्यादा होने के कारण उनके दिमाग में एक युक्ति आयी जिसे अपना कर उन्होंने अपना काम आसान कर लिया।

कंस की मृत्यु के पश्चात उसका ससुर जरासन्ध कृष्ण से बहुत ही ज्यादा क्रोधित हो उठा था। उसने कृष्ण व बलराम को मारने हेतु मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया।  प्रत्येक बार उसको पराजय का सामना करना पड़ा।  उसने श्री कृष्ण से परेसान सब जगहों के राजाओं से अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए संपर्क किया।

काफी शक्तिशाली सेना होने के बाद उसने श्री कृष्ण पर फिर से आक्रमण कर दिया। परंतु इस बार भी श्री कृष्ण ने उसके साथ आये सभी सैनिकों और राजाओं को युद्ध क्षेत्र में मार दिया। श्री कृष्ण प्रत्येक बार के युद्ध में जरासंघ को जीवित छोड़ देते थे।

यह सब देख कर श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने पूछा कि तुम हर बार जरासंघ को जीवित क्यों छोड़ देते हो? वह फिर से अपनी सेना बनाकर हमला करेगा।

तब हंसते हुए श्री कृष्ण ने बलराम जी को समझाया कि हे भ्राता मेंरी बात ध्यान से सुनना। मैं जरासन्ध को बार बार जानबूझकर इसलिए छोड़ देता हूँ कि ये जरासन्ध पूरी पृथ्वी से दुष्टों को अपने साथ लाता है। एक तरह से वह मेरा काम ही आसान कर रहा है। उसी की वजह से मैं  बहुत ही आसानी से एक ही जगह रहकर धरती के सभी दुष्टों को खत्म कर पा रहा हूँ  वरना मुझे इन दुष्टों को मारने के लिए पूरी पृथ्वी में जा जा कर ढूंढना पड़ता।  आप ही बताओ क्या इस तरह वो मेरी मदद नही कर रहा है?

बलराम ने कहा कि आप बहुत समझदार है। आपकी नीति की प्रसंशा करनी ही होगी। ऐसा कहकर बलराम वहाँ से चले गये।

इस तरह श्री कृष्ण ने जरासंघ के माध्यम से संसार के सभी दुष्टों का विनाश कर दिया।

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