The Unknown Secret of Mahabharata Part- 6

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Krishna’s policy for victory of Pandava in the war of Mahabharata –

To win Pandavas in the battle, Krishna thought of a trick. He conveyed this fact to Duryodhana that if he bleeds a person (By sacrificing life energy is released and then the same energy can be controlled by another person) in Amavasya, and then the Kurus victory is sure. When this matter reached Duryodhana, he went to meet Sehdev to ask about the auspicious time. Sehdev was knowledgeable of astrology and used to tell the right thing. He told Duryodhana that if he bleeds on the new moon day (means the lunar phase of the new moon), he must be victorious in the war.

Krishna was listening to Sahdev and Duryodhana’s speech quietly. After Duryodhana’s departure, he told Sahdev that you should not tell Duryodhana the right thing. On this Sahadeva said that how can I tell astrology the wrong way. Whatever comes to me, I tell him the right and the truth.

Krishna decided to do Amavasya a day before the new moon. He started worshiping themselves a day before the new moon day. Seeing them, some other people started worshiping the new moon. People started thinking that the sun and moon were coming in front of each other tomorrow but why Krishna is today worshiping the new moon? The sun and moon came to Krishna and began to say that the new moon is tomorrow. Then why are you worshiping today?

Krishna replied that the sun and the moon are in front of me, so can not the new moon today? Duryodhana got confused because of this kind of Krishna worshiping the new moon, and on the same day, he also sacrificed his bleeding. This strategy of Krishna also became one of the reasons for the defeat of Kauravas.

The decision of Mahabharata’s best warrior-

Krishna had told Barbarik that you should see the whole battle during the war at the top of the mountain. Later your statement about the best warrior will be decisive so that no one is suspicious.

After the defeat of Kauravas and victory of Pandavas in the battle of Mahabharata, Krishna asked Barbarik, tell what you saw in the battle of Mahabharata.

Barbarik said that “O” Krishna, I saw two things in this fight. In which there was a Cycle (Chakra) and another terrible shape ( Braham Kapal) was drinking blood. I saw two heroes (Warriors) in the battle of Mahabharata. There were an old man and a child.

The old man was Bhishma and the child was Abhimanyu. There was no other heroic man in this fight. By listening to this, the Pandavas were defeated in the form of bravery.

Preparation of Royal Yagya-

After the victory of the Pandavas, a royal yajna took place, in which Krishna took up the task of lifting the leaves of food. They chose Karna to donate the gift. The royal yagya was going on, but it was decided that Yagya was successful or not? That is why the Panchaganya conch was kept in Yagya. Krishna said that when this conch shell starts sound itself, then understand that yagya is successful.

A lot of days passed by the sacrifice, but no sound came from the conch. Being worried, Yudhishtir asked, “What is the matter, no sound heard from the conch?” Krishna said that in this area only one person has been left who has not eaten food. Until he does not eat, the Yagya will not be successful. A Saint has descended in Kashi Nagar, you bring him, and then Yagya will be successful.

महाभारत के अनजान रहस्य भाग-6

पांडवों के पक्ष में युद्ध रखने की कृष्ण नीति-

पांडवों की युद्ध में विजय होने के लिये कृष्ण ने एक युक्ति सोची। उन्होंने यह बात दुर्योधन तक पहुंचा दी कि यदि वह रक्त बली देता है तो कौरवों की विजय होगी। जब यह बात दुर्योधन तक पहुंची तो वह सहदेव के पास आकर रक्त बली देने हेतु शुभ मुहूर्त के बारे में पूछने आया। सहदेव ज्योतिष विद्या के जानकार थे और सही बात बताते थे। उन्होंने दुर्योधन को बताया कि यदि वह अमावस्या के दिन रक्त बली करता है तो युद्ध में उसकी अवश्य विजय होगी।

कृष्ण सहदेव ओर दुर्योधन की वार्ता को चुपचाप सुन रहे थे। दुर्योधन के जाने के बाद उन्होंने सहदेव से कहा कि तुमने दुर्योधन को सही बात नहीं बतानी चाहिये थी। इस पर सहदेव ने कहा कि मैं ज्योतिष की बात को कैसे गलत बताया सकता हूँ। मेरे पास जो भी आता है,मैं उसको सही और सत्य बात ही बताता हूँ।

कृष्ण ने अमावस्या के एक दिन पहले ही अमावस्या करने का निर्णय किया। वह अमावस्या के एक दिन पहले खुद ही पूजा करने लगे। उनको देखकर कुछ और लोग भी अमावस्या की पूजा करने लगे। लोग सोचने लगे कि सूर्य और चंद्रमा तो कल एक दूसरे के सामने आने थे, लेकिन कृष्ण आज ही अमावस्या की पूजा क्यों कर रहे हैं? सूर्य और चन्द्र कृष्ण के पास आये और कहने लगे कि अमावस्या तो कल है। फिर आप आज ही पूजा क्यों कर रहे हैं ?

कृष्ण ने जबाब दिया कि सूर्य और चंद्रमा तो मेरे सामने ही हैं, तो क्या आज अमावस्या नहीं हो सकती ? कृष्ण के इस प्रकार अमावस्या की पूजा करने के कारण दुर्योधन भ्रमित हो गया और इसी दिन उसने भी रक्त बली दे दी। कृष्ण की यह रणनीति भी कौरवों की हार का एक कारण बनी।

महाभारत के सर्वश्रेष्ठ योद्धा का निर्णय-

कृष्ण ने बर्बरीक से कहा था कि तुम युध्द के समय पूरी लड़ाई को पहाड़ की चोटी से देखना। बाद में सर्वश्रेष्ठ योद्धा के बारे में तुम्हारा कथन निर्णायक होगा ताकि किसी को कोई संदेह न रहे।

महाभारत के युद्ध में कौरवों की हार व पांडवों की विजय के बाद कृष्ण ने बर्बरीक से पूछा कि बताओ तुमने महाभारत की लड़ाई में क्या देखा ? बर्बरीक ने कहा कि हे कृष्ण, मैंने इस लड़ाई में दो चीज़ें देखी। जिनमें एक चक्र था और एक और भयानक आकृति थी जो रक्त पी रही थी। मैंने इस महाभारत की लड़ाई में दो ही वीर देखे। जिनमें एक बूढ़ा था और एक बच्चा था। बूढ़ा व्यक्ति भीष्म पितामह थे और बच्चा अभिमन्यु था। इस लड़ाई में और कोई वीर पुरुष नहीं था। यह बात सुनकर पांडवों को वीर होने का भृम टूट गया।

राजसी यज्ञ की तैयारी-

पांडवों की विजय के बाद राजसी यज्ञ हुआ जिसमें कृष्ण ने खाने के पत्तल उठाने का कार्य संभाला। उन्होंने भेंट का दान करने के लिए कर्ण को चुना। राजसी यज्ञ चल रहा था किंतु इस बात का निर्णय होना था कि यज्ञ सफल हुआ या नहीं। इसलिये यज्ञ में पांचजन्य शंख रखा गया था। कृष्ण ने कहा कि जब इस शंख से स्वतः ही आवाज़ आने लगेगी तो समझना कि यज्ञ सफल हुआ।

यज्ञ चलते-चलते काफी दिन बीत गये पर शंख से कोई आवाज़ नहीं आयी। चिंतित होकर युधिष्ठिर ने पूछा कि क्या बात है जो शंख से आवाज़ नहीं आ रही है ? कृष्ण ने कहा कि अभी इस इलाके में एक ऐसा व्यक्ति छूट गया है जिसने भोजन नहीं किया है। जब तक वह भोजन नहीं करेगा, तब तक यज्ञ सफल नहीं होगा। काशी नगर में एक संत अवतरित हुआ है तुम उसको लेकर आओ तब यज्ञ सफल होगा।

शेष-महाभारत का अनजान रहस्य भाग 7 में

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