The world is in the hands of Demonic Force?

Spread the love
KAL BRAHM

Are we in the hands of any demonic force? So intelligent man is not able to contemplate on this. Is this hypothetical thing?

Kabir said that all the invisible forces of this world have been the virtues of men of all ages, acting according to them. Kaal is giving punishment to all the creatures of the world according to their deeds. After all, why did not the people of Goddess know about God? This was due to the fact that Kalpurush did not allow anyone to distinguish the absolute man. That is why people know only about the formless ego in the oldest scriptures of the world.

We have to be fair and honest. When we are such, one thing will come to understand that there is something really wrong happening in this universe. All of us have made mentality that once we kill thousands of millions of people, we say that this is our divine. The person who is taking birth is going to die again. Who can have killed him? This is Maya. Dashavatar of the son of the incarnation is also of Maya.

Supreme Father is so kind. He has no malice with anyone. We all have our own children but have come in someone else’s hands. If a man kills his child, then we call him a killer. If any dictator of the world stole the thief from the thief if he steals, then the people call him cruel ruler. If you utter a tongue on lying, then we do not accept such a judgment because the lie is a person sometimes speaking in life sometimes. If alcohol drinks that which get boiled, then the rebellion will occur. These sentences do not accept public opinion.

After all, how was the arrangement of such a system? Why there have been such arrangements in the beginning that we have read. If a man used to have sex with a woman, then he was embraced on a hot red iron woman. Ugandan President Iddine Amin was beaten to death by hanging him on the crossroads. If there is revolt then is our God too cruel? Who arranged so cruel and ruthless punishment?

If we reflect on this, then we will feel that we are in the hands of a cruel force. It is a matter of thinking that there is no peace and happiness in this world of cruel power. The power generated by the illusion of three qualities i.e sex,anger, greed, attachment, and ego has troubled every creature. Here the creatures kill each other and eat it. Someone starts exploiting, loses respect, loses some money, someone kills without any animosity, someone loses unsparing peace.

If you also want to live in peace, people will not let you stay in peace. Thieves will steal you by stealing even if you do not want to. Sudden illness will occur in the healthy body. Along with your body will also be stripped. Parents leave suddenly after leaving a child who drinks milk. Young sisters become widowed and we are forced to suffer the same sufferings as all the mountains.

In your own thoughts, do you think that in reality is this world a place to live? If it was, in fact, the world created by that supreme power, then there would be peace and happiness here. There would be nectar and permanent happiness. It is true that this world has been created only by the hands of Param Purush (Supreme Father, but it is also true that its operation is in the hands of any demonic power. That’s all we are seeing this spectacle.

The way the creator and the cradle can vary, in the same way, the person who generates this world and who runs it is also different. The operation of this world is not being done according to the will of the one who created it, because the world is realizing that it is in the hands of a cruel force. Therefore, no creature in this world is receiving permanent happiness, permanent peace and permanent happiness. The creature is praiseworthy.

Kabir Sahib said through a couplet-

“चस्मेदिल से देख तू, क्या क्या तमासे हो रहे,
दिलषितां क्या क्या हैं तेरे द सताने के लिये।
एक दिल लाखों तमन्ना, उस पर भी ज्यादा हवश,
फिर ठिकाना है कहाँ उसको बैठाने के लिये।।“


  “Ask yur heart, is this world not the Drama? How many ways have there been to destroy one’s heart? Apoor heart has millions of desire for oneself, but it is never complete but he does not leave the place to sit in the heart of the supreme Father, by which all desires are fulfilled.”

क्या हम सचमुच किसी शैतानी ताक़त के हाथ में हैं?

क्या हम किसी शैतानी ताक़त के हाथ में है ? इतना बुद्धिमान मनुष्य इस पर चिंतन नहीं कर पा रहा है। क्या ये कपोल कल्पित बातें हैं ?

कबीर जी ने कहा कि इस संसार की सभी अदृश्य शक्तियाँ सभी काल पुरुष के गुण गया रही हैं, उन्हीं के अनुसार कार्य कर रही हैं। काल संसार के समस्त जीवों को उनके कर्मों के अनुसार सज़ा और फल दे रहा है। आखिर देवादि लोगों को परमपुरुष का पता क्यों नहीं चला? इसकी यह वजह रही कि कालपुरुष ने परमपुरुष का भेद किसी को नहीं लेने दिया। इसलिये संसार के सबसे पुराने धर्मग्रन्थों में निराकार ईस्वर की बात ही लोग जानते हैं।

हमको निष्पक्ष और ईमानदार बनना होगा। जब हम ऐसे होंगें तो एक बात समझ में आएगी कि सच में इस ब्रह्मांड में कुछ गड़बड़ हो रही है। हम सबकी मानसिकता ऐसी बनी है कि एक बार मे जो हज़ारों लाखों जीवों को मार डालता है, हम कहते है कि ये हमारा परमात्मा है। जो जन्म ले रहा है उसकी फिर मृत्यु हो रही है। जिसने पैदा किया क्या वह उसको मार सकता है? यह माया है। ईस्वर के दशावतार भी माया के ही हैं।

वह परमपुरुष तो बहुत दयालु है। उसको किसी से कोई द्रोह नहीं है। हम सब उसकी ही संतानें है पर किसी और के हाथों में आ गयी हैं। यदि एक आदमी अपने बच्चे को मार दे तो हम उसे हत्यारा कहते हैं। यदि दुनिया का कोई हुक्मरान चोरी करने पर चोर के हाथ काट दे तो जनता उसे क्रूर शाशक कहती है। झूठ बोलने पर जीभ काट दे तो हमको ऐसा न्याय मंज़ूर नहीं है क्योंकि झूठ तो इंसान जीवन में कभी न कभी बोलता ही है। जो शराब पिये उसको उबला तेल पिला दिया जाये तो विद्रोह हो जाएगा। इन सज़ाओं को जनमानस स्वीकार नहीं करता है।

आखिर ऐसी व्यवस्था का स्रजन कैसे हो गया ? क्यों आदिकाल में ऐसी व्यवस्था रही हैं जो हमने पढ़ी हैं। यदि कोई मनुष्य पर स्त्रीगमन करता था तो उसे गर्म लाल लोहे की स्त्री पर आलिंगन करवाया जाता था। युगांडा के राष्ट्रपति इद्दी अमीन मौत की सज़ा चौराहे पर खड़ा करके हथौड़ों से पीटकर करवाता था। वहाँ भी विदोह हुआ तो क्या हमारा भगवान भी इतना क्रूर है ? इतनी क्रूर और निर्मम सज़ाओं की व्यवस्था किसने की ?

अगर हम इस पर चिंतन करेंगे तो हमको लगेगा हम किसी क्रूर ताक़त के हाथ में हैं। सोचने की बात है कि इस क्रूर ताक़त के संसार में शांति और सुख है ही नहीं। त्रिगुणी माया से उतपन्न शक्तियां काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार ने हर जीव को परेशान कर रखा है। यहाँ जीव एक दूसरे को मारकर खा जाता है। कोई शोषण करने लगता है, कोई ईज़्ज़त लूट लेता है, कोई धन लूट लेता है, कोई बिना किसी दुश्मनी के मार डालता है, कोई बेमतलब शांति लूट लेता है।

यदि आप शांति से रहना भी चाहोगे तो लोग तुमको शांति से भी नहीं रहने देंगे। आपके न चाहते हुए भी चोर आपकी चोरी करके ले जाएगा। स्वस्थ शरीर में अचानक बीमारी लग जायेगी।अचानक आपका शरीर भी छीन लिया जाएगा। दूध पीते बच्चे को छोड़कर माता पिता का अचानक निधन हो जाता है। जवान बहिनें विधवा हो जाती हैं और हम सभी पहाड़ों के समान दुखों को भोगने के लिए विवश हो जाते हैं।

खुद ही आप विचार करें कि क्या वास्तव में ये संसार रहने के लायक जगह है? यदि यह वास्तव में उस परम सत्ता के द्वारा निर्मित संसार होता तो यहाँ परम् शांति और सुख होता। यहाँ अमृत होता और स्थायी आनंद होता। यह सच है कि इस संसार का स्रजन परमपुरुष के हाथों ही किया हुआ है परंतु यह भी सच है कि इसका संचालन किसी शैतानी ताक़त के हाथों में है। तभी तो हम सब यह तमाशा देख रहे हैं।

जिस प्रकार पैदा करने वाला और पालने वाला अलग अलग हो सकता है उसी प्रकार इस संसार को पैदा करने वाला और इसको चलाने वाला भी अलग अलग है। इस संसार का संचालन इसको पैदा करने वाले की इच्छानुसार नहीं हो रहा है क्योंकि यह संसार किसी क्रूर ताक़त के हाथों में होने का अहसास करा रही है। इसलिये इस संसार के किसी भी जीव को स्थाई सुख, स्थाई शांति और स्थाई आनंद प्राप्त नहीं हो रहा है। जीव प्रयासरथ है।

कबीर साहिब ने एक दोहे के माध्यम से कहा—


“चस्मेदिल से देख तू, क्या क्या तमासे हो रहे,
दिलषितां क्या क्या हैं तेरे द सताने के लिये।
एक दिल लाखों तमन्ना, उस पर भी ज्यादा हवश,
फिर ठिकाना है कहाँ उसको बैठाने के लिये।।“

………………….ओम सत्य साहिब……………………….


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *