Think Big

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One day a boy went to the village to wander around the city. He had a few bucks that were now over. He was starving, but his lunch box had only bread left. He was not able to think big that what to do? ?

He used to eat bread on the banks of the footpath. He breaks them and thus eats like eating with lentils and vegetables too. When a passer passing through there, he looked at him and asked, you have only bread and you are eating like as you have full food ? He asked the boy why you are doing like this ?

The boy replied that all my money is over and I have nothing besides this one bread. Therefore I am thinking that I have pickles also. Thinking about eating in my mind gives me the taste of pickle.

Passer said that when you are getting a taste of pickle by thinking in your mind, then you can assume taste of some other good thing too? If you have chance then you should think a bit bigger.

The boy said that you are right but this thing has not come in my mind. When it comes to thinking, why not think big. It is said that if a person tries honestly, he feels like he gets it.

Kabir Says-

“जाकी सुरति लाग रह जहवाँ, कह कबीर पहुंचाऊं तहवाँ”I

“It is true that you become as you think”

Hindi Translation-

बड़ा सोचें –

एक दिन एक लड़का गांव से शहर की ओर घूमने के लिये गया। उसके पास थोड़े रुपये थे जो अब खत्म हो गये थे। उसको भूख सता रही थी लेकिन उसके टिपिन में केवल एक रोटी ही बची थी।

वह फूटपाथ के किनारे बैठकर रोटी खाने लगा। वह रोटी को तोड़ता और इस प्रकार खाता कि जैसे दाल और सब्ज़ी भी खा रहा हो। एक राहगीर की नज़र उस पर पड़ी तो उसने पूछा, तुम्हारे पास केवल एक रोटी है और तुम इस तरह से खा रहे हो जैसे तुम्हारे पास पूरा खाना हो? उसने लड़के से पूछा कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो?

लड़के ने जबाब दिया कि मेरे सारे पैसे खत्म हो गए हैं और मेरे पास इस एक रोटी के अलावा कुछ नहीं है इसलिए मैं मन में सोच रहा हूँ कि मेरे पास अचार भी है। मन में सोचकर खाने से मुझे अचार का स्वाद मिल रहा है।

राहगीर ने कहा कि जब तुमको मन में सोचने मात्र से  अचार का स्वाद मिल रहा है तो तुम कोई बढ़िया चीज़ का स्वाद भी तो ले सकते थे? तुम जैसा सोचते हो तुमको वैसा मिलता है तो फिर तुमको कुछ बड़ा सोचना चाहिये। लड़के ने कहा कि आप सही कह रहे हैं पर मेरे दिमाग में तो ये बात आयी ही नहीं। जब सोचना ही है तो क्यों न बड़ा सोचा जाये। कहते हैं यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी के साथ प्रयत्न करें तो वह जैसा सोचता है, उसको वैसा ही मिल जाता है।

कबीर कहते है-

“जाकी सुरति लाग रह जहवाँ, कह कबीर पहुंचाऊं तहवाँ”

जिसका ध्यान जहाँ लगा रहता है, वो वहीं पहुँच जाता है।

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