Truth beyond legend.

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Satguru Kabir lived in Kasi Nagar”Varanasi” for one hundred and twenty years and started a Kabir cult and did many leelaans there to preach people. Whenever they descend from Satylok to the earth, most of the time he come first in Kasi Nagri.

In Dwapar Era, he came in Dastakapuri’s Jattha Nagar Garh in Kiranar. In Treta Era he came Ayodhyapuri and met Vashisht . He also went to Lanka. There King Ravana tried to cut his throat seventy times from the sword but could not be succeed. Ravana’s queen Mandodari and brother Vibhishan become his disciple. Preaching to Hanuman in Pampur. Meet with Null and Neel  and remembered their power restored during making bridge over sea. Teach the Munis.

In Satyuga, he came to Srinagar Badrinath to meet king  Shilnidhi. There he converted stone statue to the miraculous stone. When he came to Kalyuga for the first time, he  freed so many peoples from birth liberation from shackles of death by preaching the message of salvation. The same scripture which became the same Sudarshan, who came in the sacrifice of the Pandavas, seven times the bell ranged and yagna become  succeeded.

Two hundred and thirty-three years after the passing of Kaliyug, after killing Kansh by Shri Krishna, Ugrasen was seated on the throne. There lived two years in Mathurapuri. Later, after suffering from Jarasangha, Shri Krishna settled the Dwarikapuri in the sea and stayed there. There he met Shri Krishna and preached Garuda and liberated him.

When Shri Krishna’s body found in sea shore to king Nal Madhava, he built his temple for the seventh time and made idols. He met Chandan Shahu in the year 1133, got Ratanbai in Mathurapuri in the year 1508. Meet Vikramaditya in the year 3044. In the year 3263, met with Narahari Brahmins there also.

In the year 3689, he met with Chandan Sahu against request of Sudarshan again. He already met Chandan Shahu before 426 years ago, when he had given advice to him but he did not believed. In 3944, he found to  Noor Ali  in the Laharatara pond of Kasi. In the year 4064, he met Dharmadas. The current kalayuga is 5048 years. Satguru Kabir took Ramanand to Satylok to the last leelaa in Maghar situated in Gorakhpur district in UP..

Who Was Kabir


हिंदी अनुवाद—

सतगुरु कबीर कासी नगरी में एक सौ बीस वर्ष रहे ओर अनेक लीलायें की ओर कबीर पंथ चलाया।जब भी वे सत्यलोक से पृथ्वी में उतरते हैं, ज्यादातर पहले कासी नगरी में आते हैं।

द्वापर में द्वारिकापुरी  के ठट्ठा नगर गढ़ किरनार में आये। त्रेता युग में अयोध्यापुरी आकर वशिष्ट जी से मिले। लंका पूरी गये। रावण ने सत्तर बार गले को तलवार से काटा पर गला कटके दुबारा जुड़ गया और रावण हार गया।लंका में मंदोदरी ओर विभीषण को अपना चेला बनाया। पम्पापुर में हनुमान जी को उपदेश दिया। नल नील से मिले।मुनियों को उपदेश दिये।

सतयुग में  श्रीनगर बद्रीनाथ शीलनिधि राजा को मिले। पत्थर को पारस बनाया। कलयुग में पहली बार आये तो श्रपच को उपदेश देकर मुक्त किया। श्रपच वही सुदर्शन हुए जो पांडवों के यज्ञ में आये तब सात बार घंटा बजा और यज्ञ सफल हुआ।

दो सौ तैत्तीस वर्ष कलयुग के बीतने पर श्री कृष्ण द्वारा कंश को मारने के बाद, उग्रसेन  को राज़ गद्दी पर बैठाया। वहाँ दो वर्ष मथुरापुरी में रहे। बाद में काल यमन जरासंघ से त्रस्त होकर श्री कृष्ण ने द्वारिकापुरी को समुन्द्र के बीच बसाया तो वहाँ रहे। वहाँ श्री कृष्ण से मिले और गरुड़ को उपदेश देकर मुक्त किया।

जब श्री कृष्ण का शव समुन्द्र किनारे राजा नाल माधव को मिला तब सातवीं बार उनका मंदिर बनवाया और मूर्तियाँ बनाई। वर्ष 1133 में चंदन साहू को मिले, वर्ष 1508 में  मथुरापुरी में रतनबाई को मिले।  वर्ष 3044 में विक्रमादित्य को मिले। वर्ष 3263 में नरहरि ब्राह्मण को मिले।

वर्ष 3689 में चन्दन साहू से सुदर्शन के कहने पर फिर मिले । चन्दन साहू से 426 वर्ष पहले भी मिले थे जब उनको उपदेश दिये थे पर उन्होंने नहिं माने थे।वर्ष 3944 में कासी नगरी के लहरतारा तालाब में नूर अली को मिले।  वर्ष 4064 में धर्मदास को मिले। वर्तमान कलयुग का 5048 वर्ष है। सतगुरु कबीर ने मगहर में अंतिम लीला की ओर रामानंद को सत्यलोक ले गये।

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