Types of human beings

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Sri Krishna

If seen, the ratio of the number of good and bad people in this world is not the same. However many Good and devoty people are living in this world. Generally, there are three types of human beings are living in this world.

First categories of people are those who say that eat plenty, drink, dance, sing, play and enjoy a lot of fun. Nobody has seen God. These people are those who make fun of devotees and prefer to call themselves modern. Such people are called “Palmer” in the classical language.

The second category of people are those who accept God a little bit and if they get a chance, they also do satsanga. These people also get involved in religious gatherings. Although these people are believers, their brains are mostly engaged in taking advantage of the world’s things.

On receiving an opportunity, they also travel to charity, work of virtue and pilgrimage places. Whoever is such, these people are better than Palmer people because these people do not believe in harassing anyone. Such people are called “social creatures” ​​in the classical language.

The third categories of people are those who are always engaged in the welfare of their soul. Such people believe in sin, virtue, good deeds and bad deeds, and the policy understands altruism. These people are aware of their welfare. Sometimes such people can not get a good route due to which such people go astray. Such people are called “paramountry creatures” in classical language.

मनुष्य के प्रकार-

देखा जाये तो इस संसार में अच्छे और बुरे लोगों की संख्या का अनुपात समान नहीं है। फिर भी अच्छे लोगों की संख्या बुरे लोगों से कम ही है। अच्छे लोग काफी धर्मनिष्ठ लोग इस संसार में निवास कर रहे हैं। इस दुनिया में तीन तरह के लोग निवास कर रहे हैं।

पहले वे हैं जो कहते है कि खूब खाओ, पियो, नाचो गाओ, खेलो कूदो और खूब मौज मस्ती करो। किसी ने भगवान को नहीं देखा। यह लोग वे हैं जो भक्ति भाव वालों का मज़ाक भी बना देते हैं और अपने को मॉडर्न कहलाना पसंद करते हैं। ऐसे लोगों को शास्त्रीय भाषा में पामर कहते हैं।

दूसरे किस्म के वे लोग हैं जो भगवान को थोड़ा बहुत मान लेते हैं और मौका मिले तो सत्संग भी कर लेते हैं। ये लोग धार्मिक समारोहों में भी शामिल हो जाते हैं। वैसे तो ये लोग आस्तिक होते हैं परन्तु इनका दिमाग ज्यादातर संसार की चीज़ों का लुफ्त उठाने में लगा रहता है। मौका मिलने पर ये लोग दान, पुण्य के काम और तीर्थ स्थानों की यात्रा भी कर लेते हैं। जो भी हो ऐसे लोग पामर लोगों से अच्छे होते हैं क्योंकि ये लोग किसी को कष्ट देने में विश्वास नहीं करते हैं। ऐसे लोगों को शास्त्रीय भाषा में संसारी जीव कहा जाता है।

तीसरे वे लोग हैं जो हमेशा अपनी आत्मा के कल्याण में लगे रहते हैं। ऐसे लोग पाप, पुण्य, अच्छे कर्म व बुरे कर्मों को मानते हैं और नीति अनीति को समझते हैं। ये लोग अपने कल्याण के लिये जागरूक रहते हैं। कभी -कभी ऐसे लोगों को अच्छा मार्ग नहीं मिल पाता जिस कारण ऐसे लोग भटक जाते हैं। ऐसे लोगों को शास्त्रीय भाषा में परमार्थी जीव कहा जाता है।

सब मिलाकर ये तीन तरह के लोग संसार में पाये जाते हैं। प्रत्येक तरह के जीव के लिये यह आवश्यक है कि वह विचार करे कि उसके लिये अपने कल्याण के लिये कौन सा मार्ग चुनना उपयुक्त रहेगा।

............ओम सत्य साहिब................

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