Voice of inner soul

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In life, a man sometimes has to go through such situations when he has to travel inside instead of going out. Man becomes very happy by traveling outside because he is interviewed by nature. If he is warned not to leave for some time, his heart becomes depressed. But at such a time, if he travels inward, he can get answers to many questions by listening to the voice of the inner soul coming from within, and can also experience immense happiness.

There was a king who was great. His kingdom had a wealth of wealth and the people of the state were very rich. There were many ministers under the king. The most senior and trusted minister among all his ministers was old now.

After the senior minister retired, the king was worried about the successor who succeeded him. Due to this concern, the king could not even sleep properly at night. He kept thinking about the solution of the problem day and night, but he could not think of any solution.

One day a thought came to the mind of the king that whatever the minister becomes in future, it must be tested. He got the message circulated in his state that anyone educated person who wants to become the successor of the state can apply but will have to pass the exam.

Application of only three people received in the state. The three candidates were called to appear in the examination. King said that the exam time has been fixed for three days. The person who will get first position on the third day will be the successor of the kingdom. He will be given the responsibility of running the state properly while providing all the facilities of the state.

According to the plan, they were made aware by the king that a new palace has been constructed where they three will have to stay for three days. All the living arrangements have been made. The palace gate will be locked from outside and there will be no other way to go outside the palace. Whoever comes out first of this palace on the third day will be nominated as the successor to the kingdom.

All the three candidates were put inside the palace and the king went outside the gate with a lock. After two days, the king came to the palace on the third day.

Two of the three candidates were very scholarly and active and kept discussing the plan to open the gate day and night. He could not even sleep properly for two days. But the third person was calm even after being a scholar and slept comfortably after eating most of the time. After waking up, he used to sit comfortably on the wall. Seeing him, he seemed to have no interest in passing the exam.

On the third day, it was the day of examination result. The learned and quiet third person comes out of the gate first. The king declared him his successor. Both the remaining persons were surprised..

They asked the king that we would like to know how the person, who used to sleep most of the time in the palace for two days without any tension, came out of the gate.

The king asked the third person how you came out. He said that before going inside the palace, he had told that there is no other way to come out from the palace except the locked gate, so I thought that when the gate is locked from outside and there is no way to get out then instead of more thinking it is better to relax.

When I meditated on the third day, my inner voice of soul said that before opening the lock, one should also check whether the gate is locked or not. To find out the answer to this question, I came to the gate and tried to open and the gate opened easily and I came out.

Never suppress the Inner voice. The more you suppress the inner voice of soul, the more it becomes subtle and weak over a period of time. So never ignore and suppress the intuition because this is your best guide allover life.

अंतरआत्मा की आवाज़-



जीवन में मनुष्य को कभी – कभी ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है जब उसे बाहर जाने की बजाय भीतर की यात्रा करनी पड़ती है। बाहर की यात्रा करके मनुष्य बहुत प्रसन्न हो जाता है क्योंकि उसका साक्षात्कार प्रकृति से होता है। यदि उसे कुछ समय के लिए बाहर न निकलने की चेतावनी दी जाती है तो उसका मन उदास हो जाता है लेकिन ऐसे समय में यदि वह भीतर की तरफ यात्रा करे तो उसे अपने भीतर से आने वाली अंतरआत्मा की आवाज़ सुनकर अनेक प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो सकते है साथ ही अत्यंत खुशी का अनुभव भी हो सकता है।

एक राजा था जो महान प्रतापी था। उसके राज्य में अकूत संपदा का भंडार था तथा राज्य की प्रजा बहुत संपन्न थी। राजा के अधीन काफी मंत्री थे। उसके सभी मंत्रियों में सबसे ज्येष्ठ व विश्वसनीय मंत्री अब बृद्ध हो गए थे।

राजा को मंत्री के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद उसका स्थान लेने वाले उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी थी। इस चिंता के कारण राजा को रात को सही से नींद भी नहीं आती थी। वह रात दिन समस्या का समाधान सोचता रहता पर उसको कोई उपाय नहीं सूझ रहा था।

एक दिन राजा के दिमाग में एक विचार आया कि भविष्य में चाहे जो भी उत्तराधिकारी बने, उसकी परीक्षा होनी जरूरी है। उसने अपने राज्य में संदेश प्रसारित करवा दिया कि जो भी पढ़ा लिखा व्यक्ति राज्य का उत्तराधिकारी बनना चाहता है वह आवेदन कर सकता है लेकिन उसे परीक्षा में उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा।

राज्य मैं केवल तीन लोगों के आवेदन प्राप्त हुए। तीनों प्रत्याक्षीयों को परीक्षा में सम्मलित होने हेतु बुलाया गया। राजा ने कहा कि परीक्षा का समय तीन दिन निर्धारित किया गया है। तीसरे दिन जो प्रथम आएगा वह राज्य का उत्तराधिकारी होगा। राज्य की समस्त सुविधायें प्रदान करते हुए उसे राज्य को सही ढंग से चलाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

योजना के मुताबिक राजा द्वारा उनको अवगत कराया गया कि एक नए महल का निर्माण कराया गया है जहाँ तीनो को तीन दिनों महल में रहना होगा। रहने की सारी व्यवस्थाएँ करा दी गई है। महल के गेट को बाहर से बंद कर दिया जाएगा तथा महल के अंदर बाहर आने का और कोई रास्ता भी नहीं होगा। तीसरे दिन जो भी इस महल से सबसे पहले बाहर आएगा, उसे राज्य का उत्तराधिकारी मनोनीत के दिया जाएगा।

तीनो प्रत्याक्षीयों को महल के भीतर डाल दिया गया तथा राजा गेट के बाहर ताला लगाकर चले गये। दो दिन गुज़रने के बाद राजा तीसरे दिन महल आये।

तीनो प्रत्याक्षियों में से दो लोग काफी विद्वान ओर सक्रीय थे ओर रात दिन गेट को खोलने की योजना पर विचार विमर्श करते रहते थे। वह दोनो दो दिनों से ठीक से सो भी नहीं पाए थे। पर तीसरा व्यक्ति विद्वान होने के बाद भी शांत था और ज्यादातर समय खाना खाने के बाद आराम से सो जाता था। ओर जगने के बाद आराम से दीवार के सहारे बैठ जाता था। उसे देखकर लगता था कि उसे परीक्षा में पास होने की कोई रुचि नहीं है।

तीसरे दिन तीनो की परीक्षा का समय आ गया था। विद्वान और शांत तीसरा व्यक्ति सबसे पहले गेट के बाहर आ गया। राजा ने उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। शेष दोनों व्यक्तियों को यह जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने राजा से पूछा कि हमारी यह जानने की इच्छा है कि महल के अंदर दो दिनों तक जो व्यक्ति रात दिन खाना खासकर सोता रहता था, वह गेट से कैसे बाहर आ गया!

राजा ने तीसरे व्यक्ति से पूछा कि तुम बाहर कैसे आये ? उसने कहा कि महल के भीतर जाने से पहले बता दिया था कि इस गेट के सिवाय महल से बाहर आने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है तो मैंने सोचा कि जब गेट पर बाहर से ताला लगा है और निकलने का कोई रास्ता भी नहीं है तो बजाय ज्यादा सोचने के मैंने आराम करना बेहतर समझा।

तीसरे दिन मैंने जब ध्यान लगा कर सोचा तो मेरी अंतरआत्मा बोली कि ताला खोलने से पहले ये भी देख लेना चाहिये कि गेट पर ताला लगा भी है या नहीं। इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिये मैं गेट के पास आया और गेट खोलने की कोसिस की तो गेट आराम से खुल गया और मैं बाहर आ गया।

कभी भीतर की आवाज को ना दबाओ। जितना अधिक आप आत्मा की आंतरिक आवाज को दबाते हैं, उतना ही यह समय के साथ सूक्ष्म और कमजोर हो जाता है। इसलिए कभी भी अंतर्ज्ञान को नजरअंदाज न करें और न ही दबाएं क्योंकि यह आपका सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शक है।

 

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