Why Vermilion

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How wise were our ancestors! In ancient times, a rule was made for women that after the marriage, the new in-laws have to put a medicine (vermilion) in the demand of their children’s care to avoid various mental stresses and diseases due to them. Why was the rule of applying vermilion only?

Most women did not follow this rule properly due to family responsibilities and negligence. That is why they were told that if you do not apply this vermillion, then your happiness will be in trouble. At the time of hearing this, the women started to forget him every day because they wanted to protect themselves in every situation.

In modern times, today’s women are more educated and sensible than before, but most do not know the scientific reason for applying it. It can also say that the ancient system considers those people backward in front of Modern Civilization. While this is not at all?  Being literate is a good thing, but being literate is not an introduction to intelligence.

It seems that women of modern times formally adopted the tradition that has been a symbol of slavery for years. Including a small mark for using a red color as a symbol of married women.. If there is not a big old in the house then that too is not necessary. Since the people of India have considered western civilization better than their civilization and culture, our Vedic traditions have collapsed.

Vermilion’s scientific significance

Indian Vedic tradition has been a scientific based tradition. According to this, especially after getting married in Hindu society, women are required to fill the vermilion in the place of the head. In the modern era, now replaced by Vermilion, other exotic attractions have taken.

Actually there is a big scientific reason behind it. This matter is completely related to health. Where the vermilon is filled at the place of the head, one of the important glands of the brain which is Brahmandarandhara. It is very sensitive. Its place is from the end of the cranium to the middle of the head. Here vermilion is applied because it contains the mercury. Mercury acts as a medicine for cranium.

This feature of mercury found in vermilion is that it keeps women away from stress. By which their brain always keeps in the state of consciousness. The vermilon is filled only after marriage, because after the marriage, when the pressure of the household comes on the woman, it usually surrounds diseases like stress, anxiety and insomnia. The effect of which is on her marital life.

Our ancestors knew very well that it is very important for a healthy and happy family, especially the health of the woman and her happiness so that the children can be served properly. For this reason, the vermillion was made to keep mentally healthy. Mercury in Vermilion is the only metal that remains in liquid form. This is beneficial for the brain; this is why vermilion is filled.

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सिंदूर लगाने का नियम

कितने बुद्धिमान थे हमारे पूर्वज । प्राचीन काल में महिलाओ के लिए एक नियम बनाया गया कि विवाह के बाद नए ससुराल में विभिन्न प्रकार के मानसिक दबाव और उनके कारण होने वाली बीमारियों से दूर रहने के लिए एक औषधि (सिंदूर) अपनी बालो की माँग में लगाना है। आखिर सिंदूर को ही लगाने का नियम क्यों था?

ज्यादातर महिलाये पारिवारिक जिम्मेदारियों और लापरवाही के कारण इस नियम का सही से पालन नहीं करती थी। इसलिये उनको कहा गया कि अगर आप यह सिन्दूर नहीं लगाओगे तो आपका सुहाग संकट में पड़ जायेगा। यह सुनते ही अब महिलाये उसे बिना भूले रोज़ लगाने लगी क्योंकि वह अपने सुहाग की हर हाल में रक्षा करना चाहती थी।

आधुनिक काल में आज के युग की महिलाये पहले की महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा शिक्षित और समझदार हैं पर ज्यादातर इसको लगाने का वैज्ञानिक कारण नहीं जानती है। यह भी कह सकते हैं कि पुरातन व्यवस्था को वे लोग मॉडर्न सभ्यता के सामने पिछड़ा हुआ मानती है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। साक्षर होना अच्छी बात है पर केवल साक्षर होना ही बुद्धिमानी का परिचायक नहीं है।

ऐसा लगता है कि आधुनिक समय की महिलायें वर्षों से चली आ रही परम्परा को गुलामी का प्रतीक मानकर ओपचारिक रूप से लगाती है। जिसमें लाल रंग के लिए कुछ भी प्रयोग कर एक छोटा सा निशान लगा लेना भी शामिल है ताकि सनद रहे। अगर घर में बड़े बूढ़े न हो तो वो भी ज़रूरी नहीं । जब से भारत के लोगों ने पाश्चात्य सभ्यता को अपनी सभ्यता और संस्कृति से अच्छा माना है, हमारी वैदिक परम्पराओं का पतन हुआ है।

सिन्दूर का वैज्ञानिक महत्त्व

भारतीय वैदिक परंपरा एक वैज्ञानिक आधारित परम्परा रही है। इसके अनुसार खासतौर पर हिंदू समाज में शादी के बाद महिलाओं को मांग में सिंदूर भरना आवश्यक हो जाता है। आधुनिक दौर में अब सिंदूर की जगह अन्य विदेशी आकर्षक चीजों ने ले ली है।

दरअसल इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है। यह मामला पूरी तरह स्वास्थ्य से जुड़ा है। सिर के उस स्थान पर जहां मांग भरी जाती है, मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण ग्रंथी जिसे ब्रह्मरंध्र होती है। यह अत्यंत संवेदनशील होती है। इसका स्थान कपाल के अंत से लेकर सिर के मध्य तक है। यहाँ पर सिंदूर इसलिए लगाया जाता है क्योंकि इसमें पारा नाम की धातु होती है। पारा ब्रह्मरंध्र के लिए औषधि का काम करता है।

सिंदूर में मिले पारे की यह विशेषता होती है कि यह महिलाओं को तनाव से दूर रखता है। जिससे उनका मस्तिष्क हमेशा चैतन्य अवस्था में रखता है। विवाह के बाद ही मांग इसलिए भरी जाती है क्योंकि विवाह के बाद जब गृहस्थी का दबाव महिला पर आता है तो उसे तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी बीमारिया आमतौर पर घेर लेती हैं। जिसका प्रभाव उसके वैवाहिक जीवन पर पड़ता है।

हमारे पूर्वज यह बात अच्छी तरह जानते थे कि स्वस्थ और सुखी परिवार के लिये खासतौर पर महिला का स्वास्थ्य और उसकी खुशी रहना बहुत आवश्यक है ताकि बच्चों का लालन पालन उचित तरीके के हो सके। इस कारण मानसिक रूप से स्वस्थ रखने ले लिये सिंदूर का प्राविधान किया गया। सिंदूर में पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल रूप में रहती है। यह मष्तिष्क के लिए लाभकारी है, इस कारण सिंदूर को मांग में भरा जाता है।

 

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